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जल्द भारत लाया जाएगा शराब कारोबारी,यूके की कोर्ट से माल्या को झटका

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लंदन। ब्रिटिश हाई कोर्ट ने भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या की प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील दायर करने की अर्जी ठुकरा दिया है। कोर्ट के इस फैसले से माल्या को जल्द भारत लाने की उम्मीदें बढ़ गई है। भगोड़ा शराब कारोबारी भारत में 9000 करोड़ रुपये की जालसाजी और और मनी लांड्रिंग केस में वांछित है। भंग हो चुके किंगफिशर एयरलाइन के 63 वर्षीय प्रमुख ने 14 फरवरी को अपने प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ अपील दायर करने की अनुमति मांगी थी। इस आदेश पर ब्रिटेन के गृह मंत्री साजिद जाविद ने हस्ताक्षर किए थे।

ब्रिटिश न्यायपालिका के लिए प्रवक्ता ने कहा, ‘जस्टिस विलियम डेविस ने शुक्रवार को अपील की अनुमति के लिए दायर अर्जी खारीज कर दी है।’ प्रवक्ता ने कहा कि माल्या के पास मौखिक विचार के लिए आवेदन करने के लिए पांच दिन का वक्त हैं। अगर फिर से कोई आवेदन किया जाता है तो यह मामला हाई कोर्ट के जज के सामने जाएगा और उसपर सुनवाई होगी॥ ब्रिटिश कानून के अनुसार पुनर्विचार प्रक्रिया में संक्षिप्त मौखिक सुनवाई होगी जिसमें माल्या और भारत सरकार की तरफ से मौजूद टीमों की तरफ से दलीलें रखी जाएंगी। इसके बाद जज इस बात का फैसला लेंगे कि इस पर पूर्ण सुनवाई की जरूरत है या नहीं।

गौरतलब है कि माल्या मार्च 2016 से ब्रिटेन में रह रहा हैं। अप्रैल 2017 में प्रत्यर्पण वारंट जारी होने के बाद से वह जमानत पर हैं। प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई दोनों भारतीय एजेंसियां माल्या के खिलाफ 9,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के बैंक धोखाधड़ी के मामलों की जांच कर रही हैं।

संकट में फंसे शराब कारोबारी ने कई भारतीय बैंकों को संतुष्ट करने के लिए अपनी शानो-शौकत की जिंदगी छोड़ने की पेशकश की थी। उसने ब्रिटिश कोर्ट को भी यह जानकारी दी थी। दरअसल, भारतीय बैंकों को माल्या से करीब 1.145 अरब पाउंड वसूलने हैं और बैंक इसमें से कुछ राशि निकालने का प्रयास भी कर रहे हैं। भगोड़े माल्या को अभी करीब 18,325.31 पाउंड की अधिकतम राशि एक सप्ताह में खर्च करने अनुमति है।

हाल में ब्रिटेन के हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान माल्या ने इस राशि को घटाकर 29,500 पाउंड मासिक करने की पेशकश की थी। हालांकि, भारतीय स्टेट बैंक की अगुआई वाले 13 बैंकों के समूह ने इस पेशकश पर सहमति नहीं दी है। दरअसल, बैंक लंदन में माल्या के आईसीआईसीआई बैंक में जमा 2,60,000 पाउंड की राशि चाहते हैं। बैंकों के साथ कानूनी लड़ाई में माल्या का प्रतिनिधित्व कर रहे डीडब्ल्यूएफ लॉ एलएलपी ने कहा कि किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व प्रमुख अदालत के द्वारा तय की गई खर्च की किसी भी सीमा को मानने को तैयार हैं।

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