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छत्तीसगढ़ में लॉकडाउन के दौरान ग्रामीणों को बांटे गए कीड़े लगे चावल, मचा हंगामा

बस्तर
छत्तीसगढ़ में एक तरफ जहां कोरोना के संकट (Corona crises) से निपटने के लिए सरकार हर स्तर पर प्रयास कर रही है और पीड़ितों को मदद करना चाहती है. वहीं सरकारी संस्थाओं में कुछ लोग ऐसे भी बैठे हैं जो सरकार की मंशा पर पानी फेरने का काम कर रहे हैं. दरअसल, नागरिक आपूर्ति निगम यानि नान द्वारा ग्रामीण इलाकों में कीड़े लगे चावल (Rice) भेजे जाने का है. इस मामले में जब ग्रामीणों (Villagers) ने हल्ला किया तब जाकर उससे संबधित विभाग हरकत में आया.

कोरोना संकट के चलते पूरे देश में लॉकडाउन लागू है. लॉकडाउन के दौरान गरीब और आदिवासी अंचलों में रहने वाले गरीब परिवारों को सहायता पहुंचाने के लिए सरकार ने 10 रुपये प्रति किलो के हिसाब से दो महीने के लिए चावल देने की योजना बनाई है. इसके तहत नान के माध्यम से जगदलपुर जिले के लोहंडीगुडा, बस्तर, तोकापाल, भानपुरी के अंदरुनी गांवों में राशन दुकानों के माध्यम राशन दिए जाने के लिए नान के माध्यम से चावल भेजा गया. इन सभी जगहों पर करीब 800 बोरा चावल बांटने के लिए भेजा गया था.

इस मामले पर हंगामा तब शुरू हो गया जब राशन दुकान में ग्रामीणों को कीड़े लगा खराब चावल दिया जाने लगा. करीब एक हफ्ते पहले जिले के ग्रामीण इलाकों में चावल बंटना शुरू हो गया. पीडीएस की दुकानों से बंटने वाले खराब चावल को लेकर ग्रामीणों ने हो हल्ला मचाना शुरू कर दिया. इसके बाद दुकान संचालक ने चावल बांटना बंद कर दिया.

कीड़े लगे चावल बांटने को लेकर दुकान संचालक और ग्रामीणों के बीच हो रहे विवाद के चलते राशन दुकान संचालकों ने चावल बांटना बंद कर दिया. इस बात की जानकारी जगदलपुर में बैठे फूड विभाग के अफसरों पता लगी. आनन फानन में इसके लिए एक जांच टीम बनाई गई. जांच टीम द्वारा प्रशासन को जो रिपोर्ट दी गयी, उसमें ये बात सामने आई कि ग्रामीणों को कीड़े लगा खराब चावल बांटने के लिए दिया गया था. उसके बाद दो दिनों के भीतर सभी जगहों से खराब चावल वापिस मंगवाकर अच्छा चावल भेजा गया.

अभी चूंकि कोरोना का संकट है इसलिए अधिकारी वर्क फ्रॉम होम के तहत काम कर रहे हैं. अधिकारी ने यह स्वीकार किया कि नान, वेयर हाउस द्वारा कीड़ा लगा चावल सप्लाई किया गया था. इस मामले में दोषी मानते हुए फूड विभाग ने कलेक्टर को उचित कार्यवाई करने के लिए अवगत करा दिया है.

वैसे नियमों की मानें तो नान, वेयर हाउस और क्वालिटी इंस्पेक्टर की देखरेख में चावल को बांटने से पहले जांचा परखा जाता है, उसके बाद उसे बांटने के लिए सरकारी दुकानों में भेजा जाता है. ऐसे में साफ है कि तीनों विभाग ने मिलकर जो सप्लाई का प्रमाण पत्र दिया उसमें ही कहीं कुछ गडबडी है. जिले भर के करीब एक लाख 90 हजार परिवारों को दो महीने के लिए चावल बांटा जा रहा है.

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