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पीपीई, N95 की कमी और शुरुआती लापरवाही, देशभर में कई डॉक्टर, नर्स कोरोना की चपेट में

नई दिल्ली
कोरोना के खिलाफ जंग में सबसे आगे खड़े डॉक्टर्स-नर्स किन मुश्किलों का सामना कर रहे हैं वह पता चल रहा है। राजधानी दिल्ली में 35 हेल्थकेयर वर्कर (ज्यादातर डॉक्टर और नर्स) कोरोना की चपेट में हैं। उनके संपर्क में आए 300 लोग क्वारंटीन में रखे गए हैं। ऐसा ही हाल मुंबई का है। वहां 90 हेल्थकेयर वर्कर को इंफेक्शन मिला। राजस्थान की कहानी भी ऐसी ही है। वहां 22 हेल्थकेयर वर्कर कोरोना पॉजिटिव हैं। मध्य प्रदेश में तो कोरोना की वजह से दो डॉक्टर्स की जान ही चली गई।

इसकी मुख्य वजह उनके पास जरूरी सुरक्षा उपकरणों की कमी को माना जा रहा है। इसमें पीपीई सूट्स, N95 मास्क आदि शामिल हैं। दिल्ली में कुछ केस शुरुआती प्रशासनिक लापरवाही के भी हैं।

दिल्ली में ज्यादातर गैर-कोरोना हॉस्पिटल वाले
डॉक्टर्स को कोरोना के मामले पर डॉ एस के सरीन वह दिल्ली सरकार द्वारा कोरोना से निपटने को बनाई फोर्स का हिस्सा हैं। सरीन कहते हैं कि ज्यादातर ऐसे केस उन हॉस्पिटल से आए हैं जो कोरोना का इलाज नहीं कर रहे। इसकी वजह शुरुआत में बरती गई लापरवाही है। उन डॉक्टर्स को भी अंदाजा नहीं होगा कि जिसमें उन्हें न के बराबर लक्षण दिख रहे हैं वह भी दूसरे को संक्रमित कर सकता है।

'पूरा वक्त पहना होगा N95 मास्क'
सरीन मानते हैं कि ऐसे हॉस्पिटल्स में डॉक्टर्स की कोरोना जांच होनी चाहिए जो कि पिछले हफ्ते तक नहीं हो रही थी। उनका मानना है कि मेडिकल स्टाफ को ड्यूटी पर रहते पूरे वक्त N95 मास्क पहनना होगा, वहीं मरीजों को सर्जिकल मास्क इस्तेमाल करना ही होगा। सरीन सैंपल टेस्ट में लगे लोगों के सुरक्षा उपरकरणों की व्यवस्था पर भी जोर देते हैं, जिसमें हजमत सूट भी शामिल है।

वहीं पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के डॉ के श्रीनाथ रेड्डी डॉक्टर्स को सुरक्षित रखने के लिए एक और सलाह देते हैं। उनका कहना है कि पीपीई की जरूरत को पूरा करने के साथ-साथ एक और चीज पर जोर दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, हाई रिस्क वाले इलाकों में युवा डॉक्टर्स की ड्यूटी लगाई जानी चाहिए क्योंकि वे वायरस संक्रमण होने पर भी जल्दी से रीकवर हो सकते हैं।

वहीं दिल्ली नर्स फेडरेशन के महासचिव लीलाधर रामचंदानी कहते हैं कि कई हॉस्पिटल्स में पीपीई किट्स तो हैं लेकिन उन्होंने स्टाफ को उन्हें ठीक से पहनना और उतारना नहीं सिखाया है। इससे भी उनमें इनफेक्शन का खतरा बना रहता है। लीलाधर ने आगे कहा कि उन्होंने दिल्ली सरकार को एक पत्र लिखा है कि नर्सों को हॉस्पिटल के पास ही रहने-खाने की सुविधाएं दें ताकि वह अनजाने में घरपर अपने परिवार को संक्रमित न कर दें। उन्होंने कहा कि ऐसे उदाहरण हैं कि मेडिकल स्टाफ का परिवार कोरोना की चपेट में आ गया। हाल में प्रकाशित एक मेडिकल जर्नल में यह बात कही गई है कि सरकार हेल्थ वर्कर को सिर्फ मोहरे के तौर पर नहीं देखे।

 

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