दुनिया

न्यूयॉर्क में वेंटिलेटर पर 10 में से 8 मरीज मर रहे

न्यूयॉर्क
कोरोना वायरस महामारी से अमेरिका का न्यूयॉर्क शहर सबसे अधिक प्रभावित है। अमेरिका में सबसे ज्यादा मौतें यहीं हुई हैं। अब डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना मरीजों को वेंटिलेटर पर रखने से मौतों के मामले बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि आमतौर पर सांस लेने की गंभीर परेशानी वाले 40 से 50 प्रतिशत मरीजों की मौत वेंटिलेटर पर होती है।

हालांकि न्यूयॉर्क में वेंटिलेटर पर 80 प्रतिशत या इससे अधिक लोगों की मौत हो रही है। कुछ डॉक्टरों का कहना है कि हो सकता है कि वेंटिलेटर वक्त के साथ मरीजों को नुकसान पहुंचा रहे हों, क्योंकि मरीज के फेफड़े में छोटे से स्थान में उच्च दबाव से ऑक्सिजन डाली जाती है। ऐसे में वे मरीजों को वेंटिलेटर पर रखने से बच रहें हैं, क्योंकि उन्हें लगता है इससे मरीजों को नुकसान पहुंच सकता है।

गंभीर मरीजों की बड़ी संख्या में मौत
डॉक्टरों का मानना है कि वेंटिलेटर पर ऐसे मरीजों को रखा जाता है, जिनके फेफड़े काम करना बंद कर देते हैं। ऐसे में मरीज के गले में एक ट्यूब डाली जाती है और उसके जरिए ऑक्सिजन पहुंचाई जाती है। गंभीर स्थिति में पहुंच चुके मरीजों की बड़ी संख्या में मौत हो रही है। ऐसे में डॉक्टर मरीजों को वेंटिलेटर पर रखने के बजाए दूसरे उपायों को तरजीह दे रहे हैं।

अमेरिकन लंग असोसिएशन के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अलबर्ट रिजो का कहना है कि अमेरिका में सामान्य से अधिक मृत्यु दर सामने आ रही है। टोरंटो जनरल अस्पताल में श्वसन मामलों के विशेषज्ञ डॉक्टर ऐडी फान का कहना है, 'वेंटिलेटर फेफड़ों की चोट को और बिगाड़ सकते हैं।' इस बीच अमेरिका में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्‍या 22,115 पहुंच गई है। बीते 24 घंटे में ही अमेरिका में 1514 लोगों की मौत हुई है।

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