खेल

आज ही भारत ने लगाया था Asia Cup का खिताबी चौका

नई दिल्ली

एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट में भारत की बादशाहत बरकरार है. भारत अब तक रिकॉर्ड सात बार यह टूर्नामेंट जीत चुका है. इस बीच 2016 में इसे टी-20 टूर्नामेंट के रूप में आयोजित किया गया था. अगला एशिया कप इस साल सितंबर में खेला जाना है, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इस पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं.

आज से 25 साल पहले शारजाह में भारत ने लगातार चौथी बार एशिया कप पर कब्जा जमाया था. आज ही के दिन (14 अप्रैल 1995) मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी में भारत ने फाइनल में श्रीलंका को 8 विकेट से मात देकर एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता साबित की थी.

इससे पहले भारत ने 1984 एशिया कप का शुरुआती टूर्नामेंट जीतने के बाद 1998 और 1990/91 में भी यह खिताब जीता. हालांकि 1986 में श्रीलंका में खेले गए टूर्नामेंट में भारत ने हिस्सा नहीं लिया था. दरअसल, तब श्रीलंका के साथ तनावपूर्ण क्रिकेट संबंधों के कारण भारत ने अपना नाम वापस ले लिया था और उसकी जगह बांग्लादेश को खिलाया गया था.

तब एशिया कप में शत प्रतिशत रिकॉर्ड रखने वाली भारतीय टीम ने 1995 में भी खिताब पर कब्जा किया. फाइनल में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंका ने 230/7 रनों का स्कोर बनाया. भारतीय टीम ने उस लक्ष्य को बड़ी आसानी से 49 गेंदें शेष रहते 2 विकेट खोकर हासिल कर लिया और एक बार फिर एशियाई क्रिकेट में अपना परचम लहराया.

फाइनल में कप्तान अजहरुद्दीन और नवजोत सिंह सिद्धू (नाबाद 84) ने तीसरे विकेट के लिए 175 रनों की अटूट साझेदारी की. इससे पहले सचिन तेंदुलकर ने 41 गेंदों पर 41 रन बनाए थे, जबकि मनोज प्रभाकर (9) ने सस्ते में अपना विकेट गंवाया था.

अजहर ने 89 गेंदों में 90 रनों की जोरदार पारी खेली, जिसमें उनके 2 छक्के और 5 चौके शामिल रहे. अजहरुद्दीन मैन ऑफ द मैच रहे, जबकि सिद्धू को मैन ऑफ द सीरीज चुना गया. उन्होंने टूर्नामेंट में 98.50 की औसत से 197 रन बनाए थे. हालांकि सचिन ने टूर्नामेंट में 68.33 की औसत से सर्वाधिक 205 रन बनाए थे.

 

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