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कैसे मिला था मुकेश खन्ना को महाभारत में भीष्म पितामह का रोल, दिलचस्प है किस्सा

 
नई दिल्ली 

मुकेश खन्ना ने यूं तो कई सारी बॉलीवुड फिल्मों में काम किया. मगर छोटे पर्दे पर प्ले किए गए अपने दो रोल्स के लिए उन्हें आज भी याद किया जाता है. पहला महाभारत में भीष्म पितामह का रोल और दूसरा शक्तिमान का रोल. आज लॉकडाउन की वजह से प्रशंसक एक बार फिर से दूरदर्शन पर मुकेश खन्ना के इस दोनों रोल्स को देख पा रहे हैं और उनके शानदार काम का आनंद ले रहे हैं. मगर महाभारत में भीष्म पितामह का रोल मुकेश खन्ना को यूं ही नहीं मिल गया. वे तो अर्जुन का रोल करना चाहते थे. मगर मुकेश का मानना है कि कुछ चीजें भगवान की इच्छा से होती हैं. उन्हीं में से एक था भीष्म पितामह का रोल. बता रहे हैं आखिर किस तरह मिला मुकेश खन्ना को ये ऐतिहासिक रोल.

कॉमेडियन पेनटल के भाई गूफी पेनटल ने महाभारत में शकुनी का रोल तो प्ले किया ही था इसी के साथ वे महाभारत के कास्टिंग डायरेक्टर्स में से एक थे. गूफी ने ही सबसे पहले मुकेश खन्ना को फोन कर बुलाया था. दरअसल गूफी, मुकेश खन्ना के साथ एक एड में पहले काम कर चुके थे. मुकेश ने पूछा कि कौन सा रोल उन्हें दिया जाएगा. गूफी ने चार नाम लिए. अर्जुन, कर्ण, कृष्ण और भीष्म. इसी तर्ज पर मुकेश ने ऑडिशन्स के लिए हामी भर दी. मुकेश की प्रिफरेंस थी अर्जुन या कर्ण.

15 फिल्मों में काम करने के बाद भी मुकेश खन्ना गेटअप में आए और ऑडिशन दिया. कुछ समय बाद गूफी की कॉल आई और उन्होंने कहा कि बी आर चोपड़ा साहब चाह रहे हैं कि तुम दुर्योधन का रोल करो. मुकेश ने ये कहते हुए साफ इंकार कर दिया कि उनके अंदर से विलेन नहीं निकलता. मुकेश आज भी ये मानते हैं कि उनकी कास्टिंग ना गूफी ने की थी ना चोपड़ा जी ने. उनकी कास्टिंग ऊपर(डेस्टिनी) से हुई थी.

 मुकेश बताते हैं कि- अर्जुन का रोल किसी और को मिल गया. राही मासूम रजा महाभारत के पटकथा लेखक थे. उन्होंने किसी एक्टर में अर्जुन की छवि देखी और उसे कास्ट करने को कहा. कर्ण का रोल भी इसी तरह हाथ से निकल गया. इसी बीच गूफी का फोन फिर से मुकेश के पास आया और उन्हें गुरू द्रोणाचार्य का रोल ऑफर हुआ. मुकेश खन्ना ने बचपन से ही महाभारत पड़ी थी और उनके मुताबिक महाभारत का हर रोल अपने आप में किसी योद्धा से कम नहीं था. उन्होंने उस रोल के लिए हामी भर दी.

द्रोणाचार्य के रोल के लिए मुकेश ने भर दी थी हामी
मगर इसी बीच जब द्रोणाचार्य का सीन आना बाकी था एक बार फिर गूफी का फोन मुकेश खन्ना के पास आता है और उन्हें बुलाया जाता है. वहां जाकर पता चलता है कि जिसे भीष्म पितामह के रोल के लिए फाइनल किया गया था उससे बात बन नहीं पाई. विजेंद्र घाटके ये रोल करने वाले थे. उनके बाद चोपड़ा साहब ने मुकेश खन्ना को ये रोल करने को कहा. और आगे इतिहास है. मुकेश खन्ना ने ये रोल बखूबी किया.

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