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कोरोना में चारधाम यात्रा कैसे? 90% बुकिंग रद्द

देहरादून
कोरोना वायरस (Coronavirus) जैसी भयानक महामारी का असर चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) पर भी पड़ा है। उधर, बैसाखी के पर्व पर ऊखीमठ स्थित भगवान ओंकारेश्वर मंदिर में पंचांग गणना से द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर और तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथियां घोषित की गईं। द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर के कपाट 11 मई और तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट 20 मई को आम लोगों के दर्शनार्थ खुलेंगे।

भगवान मद्महेश्वर के कपाट इस वर्ष 11 मई दोपहर 12 बजे खुलेंगे। उत्तराखंड के चारधाम यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ, भविष्य बदरी और तुंगनाथ सहित कई ऐसे मंदिर हैं, जिनके कपाट धार्मिक व पौराणिक मान्यताओं के तहत शरद ऋतु के दौरान बंद कर दिए जाते हैं। फिर ग्रीष्म ऋतु में एक नियत तिथि पर उन्हें श्रृद्धालुओं के दर्शनों के लिए खोल दिया जाता है।

मंत्री ने की अधिकारियों के साथ बैठक
इस बार कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से देशव्यापी लॉकडाउन के कारण इन प्रसिद्ध मंदिरों के द्वार खोलने को लेकर असंमजस की स्थिति बनी हुई है। मंदिरों को खोलने की संभावनाओं को लेकर उत्तराखंड के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने अपने देहरादून स्थित आवास से राज्य के आला अधिकारियों सचिव पर्यटन, अपर सचिव पर्यटन सहित जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग, जिलाधिकारी उत्तरकाशी, जिलाधिकारी चमोली, एपी चमोली और एपी रुद्रप्रयाग से वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिए बातचीत कर समीक्षा की।

क्या है पूरा प्लान?
चारधाम विकास परिषद के उपाध्यक्ष आचार्य शिव प्रसाद ममगांई के मुताबिक, बदरीनाथ और केदार धामों के रावलों को चमोली या जोशीमठ में क्वारंटीन करके रखे जाने पर विचार चल रहा है। इसी कारण इन्हें 15 अप्रैल तक पहुंचने को कहा गया है ताकि कपाट खुलने से पूर्व इन्हें चौदह दिन क्वारंटीन कर उन्हें मंदिर की पूजा कार्य में लगाया जा सके। इसके साथ यह भी सुझाव आ रहा है कि कपाट खुलने के दौरान होने वाली रस्मों में फिलहाल केवल बेहद जरूरी इस व्यवस्था से जुड़े लोग ही शामिल हों।

केंद्र की गाइडलाइंस का इंतजार
मंदिरों के कपाट तो मुहूर्त के अनुसार तय तिथियों पर खोल दिए जाएंगे, लेकिन भगवान के दर्शनों के लिए भक्त कब उनके धाम पर पहुंच सकेंगे, इसका निर्णय केंद्र की गाइडलाइंस के बाद किया जाएगा। चारधाम यात्रा उत्तराखंड की 12 हजार करोड़ से अधिक के कारोबार वाली एक गतिविधि मानी जाती है। इस पर प्रदेश की 30 फीसदी आबादी की निर्भरता रहती है। कोरोना संक्रमण के चलते यात्रा के शुरू होने या न होने को लेकर बने संशय के बीच अधिकतर बुकिंग रद्द हो चुकी हैं।

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