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कोरोना से कब्रगाह बने इस अस्पताल में 200 बच्चों का जन्म, माताएं और बच्चे सभी सुरक्षित

 न्यूयॉर्क 
कोरोना के कारण जिस अस्पताल में रोजाना लाशें उठ रही हों वहां इन दिनों 200 बच्चों की किलकारियां गूंज रही हैं। सुकून देने वाली यह कहानी है अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित ब्रुकलिन अस्पताल की। राहत की बात है कि अब तक किसी भी जच्चा-बच्चा की कोरोना वायरस की वजह से मौत नहीं हुई है।

न्यूयॉर्क में अब तक 10 हजार से ज्यादा लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है। वहां हर 100 में से एक आदमी इस महामारी की चपेट में है। ब्रुकलिन हॉस्पिटल सेंटर में ही पिछले एक हफ्ते में 30 मौतें हुईं जबकि एक मार्च से अब तक करीब 90 लोगों की जान गई। इनमें से कई में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी, जबकि कुछ के संक्रमित होने का संदेह था। मृतकों में पांच अस्पताल के कर्मचारी भी थे।

इन हालातों में भी डॉक्टरों ने नहीं मानी हार
इन हालातों में भी डॉक्टर और नर्सों ने हार नहीं मानी है। मैटरनिटी वार्ड में तैनात स्वास्थ्यकर्मी दिन रात गर्भवती महिलाओं और नवजातों का जीवन बचाने में लगे हुए हैं। उनके सामने न सिर्फ सुरक्षित प्रसव कराने की चुनौती है, बल्कि जच्चा-बच्चा को कोरोना के संक्रमण से भी बचाए रखना है।

जब गर्भवती महिला की जान बचाई
दो हफ्ते पहले 31 वर्षीय गर्भवती महिला, प्रीशियस एंडरसन कोरोना से संक्रमित हो गईं। पता चला कि उनके फेफड़े बेकार हो चुके हैं। उनके प्रसव में दो महीने का समय था लेकिन डॉक्टरों ने पहले ही ऑपरेशन करके उनकी और बच्चे की जान बचा ली। दो और महिलाओं की इसी तरह जिंदगी बचाई गई।

डॉक्टर बीमार तक पड़ गए
अस्पताल में प्रसूति और स्त्री रोग विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर एरोल बायर जूनियर ने बताया कि यहां आने वाली 29 गर्भवती महिलाएं कोविड-19 से पीड़ित थीं या उनमें कोरोना संक्रमण का संदेह था। उन्हें अन्य मरीजों से अलग रखा गया। स्वास्थ्यकर्मियों ने सुरक्षात्मक सूट पहनकर उनका उपचार किया। फिर भी कई डॉक्टर और नर्स बीमार पड़ गए। उन्होंने कहा कि कई महिलाएं अस्पताल आने से डरती हैं लेकिन उन्हें डरना नहीं चाहिए। हम खुश हैं कि हमने अब तक एक भी मां या शिशु को नहीं खोया है। नवजात शिशुओं के बीच कोरोना संक्रमण का एक भी मामले की पुष्टि नहीं हुई है।

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