मध्य प्रदेशराज्य

MP सरकार लेगी एक हजार करोड़ कर्ज, केंद्र ने बढ़ाई है लिमिट

भोपाल
कोरोना आपदा के बीच खराब वित्तीय स्थिति का सामना कर रही मध्य प्रदेश सरकार  बाजार से एक बार फिर कर्ज लेने जा रही है. इस बार यह कर्ज 1000 करोड़ रुपए का होगा जो आरबीआई (RBI) के जरिए लिया जाएगा. एक अप्रैल के बाद शुरू हुए नए वित्तीय वर्ष में मध्य प्रदेश सरकार का यह पहला कर्ज है. मध्य प्रदेश सरकार ने इससे पहले वित्तीय वर्ष 2019 – 20 में 22000 करोड़ रुपए का कर्ज (Debt) लिया था. हालांकि, सरकार की कुल कर्ज लेने की लिमिट 27000 करोड़ थी लेकिन वित्तीय स्थिति सुधारने और सरकार की योजनाओं के काम चालू रखने का हवाला देते हुए सरकार ने यह कर्ज लिए थे.

1000 करोड़ों रुपए कर्ज और लेने के बाद अब मध्य प्रदेश की सरकार पर कुल दो लाख 10 हजार करोड़ रुपए का कर्ज हो जाएगा. हालांकि, कोरोना आपदा के बीच आरबीआई के नए नियमों के मुताबिक, सरकार को यह कर्ज अल्प अवधि में ही चुकाना होगा. कर्ज़ को दो किस्तों में चुकाना होगा. पहली किस्त 500 करोड़ रुपए की डेढ़ साल में, जबकि अगली किस्त 500 करोड़ रुपए की 3 साल मेंं चुकानी होगी.

केंद्र ने बढ़ाई है कर्ज लिमिट
कोरोना आपदा के बीच आर्थिक मोर्चे पर एक राहत भरी खबर ये भी है कि राज्य सरकार अपनी लिमिट से 14,237 करोड़ रुपये ज्यादा कर्ज ले सकेगी. केंद्र सरकार ने अलग-अलग राज्यों के लिए कर्ज की इस सीमा को तय किया है. खास बात यह है कि इस राशि का इस्तेमाल राज्य सरकार कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में खर्च होने वाली राशि में कर सकेगी. यह राहत केवल वित्तीय वर्ष 2020 और 21 के लिए दी गई है. हालांकि, एक और बात यहां उल्लेख करने वाली है कि सरकार अगले वित्तीय वर्ष यानी 2021 – 22 में सकल घरेलू उत्पाद का केवल 3.50% ही कर्ज ले सकेगी. अतिरिक्त कर्ज मिलने से सरकार को आर्थिक मोर्चे पर थोड़ी राहत मिलेगी क्योंकि यह अनुमान लगाया जा रहा है कि कोरोना आपदा के बीच राज्य सरकारों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है इससे निपटने के लिए राहत जरूरी थी.

सरकार का आर्थिक मोर्चा
मध्य प्रदेश सरकार हर महीने करीब 6000 करोड़ रुपए खर्च वहन करती है. इसमें 2750 करोड़ रुपए कर्मचारियों के वेतन पर खर्च होता है. जबकि 1083 करोड़ रुपए पेंशनर्स की पेंशन देने पर खर्च होता है. 666 करोड़ बिजली कंपनियों के घाटे की भरपाई पर खर्च करने पड़ते हैं. जबकि 1166 करोड़ राज्य सरकार पर कुल कर्ज की ब्याज अदायगी पर होता है. कोरोना आपदा की वजह से प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर काफी बुरा असर पड़ा है. सरकार के टैक्स कलेक्शन में सीधे तौर पर दो हजार करोड़ रुपए की कमी आई है. सभी राज्य सरकारों ने केंद्र से कर्ज की सीमा बढ़ाए जाने का अनुरोध किया था.

Tags

Related Articles

Back to top button
Close
Close