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PF पर 8.5 पर्सेंट ब्याज का वादा अब कैसे होगा पूरा?

 नई दिल्ली
जब ईपीएफओ ने बीते वित्त वर्ष के लिए पीएफ पर ब्याज घटाकर 8.5 फीसदी कर दी थी तो आप निराश हुए थे? अभी और निराश होने के लिए तैयार रहिए। आपके पीएफ पर ब्याज महज 7 पर्सेंट पर सिमट सकता है। EPFO ने जो 8.5 फीसदी के ब्याज की घोषणा की थी, वह पूरे वित्त वर्ष के दौरान ऑर्गनाइजेशन के कॉरपस मिले रिटर्न्स पर आधारित थी।

EPFO को करीब 27000 करोड़ रुपये का नुकसान!
6 मार्च को हुई एक बैठक से जुड़ी खबर के मुताबिक, डेट इन्वेस्टमेंट से 8.15% और बाकि 0.35% इक्विटी में निवेश से हुए प्रॉफिट से मिलेगा। लेकिन शेयर बाजार तो मार्च में धड़ाम हो गया जिसमें EPFO की इक्विटी इन्वेसटमेंट्स को करीब 27000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। बहरहाल फिलहाल इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि EPFO फंड मैनेजरों ने इसमें से कुछ निवेश को बेंचमार्क इंडेक्सेस के गिरने से पहले बेच दिया था या नहीं। मार्च में बेंचमार्क इंडेक्सेस में करीब 30 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। यहां यह जानना जरूरी है कि EPFO कॉरपस में से 6 फीसदी से कम इक्विटी में निवेश किया गया था। हमारा अनुमान कहता है कि अगर इक्विटी के हिस्से को रिटर्न कैलकुलेशन के वक्त ध्यान में रखा जाए तो वित्त वर्ष 2019-20 के लिए EPFO 7 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न नहीं दे पाएगा।

1.5% की कमी बहुत बड़ी
पीएफ पर रिटर्न में 1.5% की कमी हो सकता है कई लोगों को बहुत बड़ी कमी न लग रही हो जब शेयर बाजार 30 पर्सेंट गिर चुके हैं, म्यूचुअल फंड का रिटर्न 10-20% नीचे आ गया है और ब्याज दरों में 70-80 बीपीएस की गिरावट आ चुकी है। लेकिन PF मेंबर्स के लिए मार्केट-लिंक्ड रिटर्न्स कोई खास मायने नहीं रखते। PF पर रिटर्न अगर 15 बेसिस पॉइंट्स भी कम हो जाए तो उनके लिए बड़ी चिंता की बात होती है। और मौजूदा समय में तो यहां 1.5% की कटौती की बात हो रही है।
NBT

भविष्य के रिटर्न्स पर असर!
EPFO अपना कुछ इक्विटी निवेश बेचकर मिलने वाली रकम का इस्तेमाल 8.5% का ब्याज देने में कर सकता है, जिसकी उसने घोषणा की थी। भारतीय मजदूर संघ जनरल सेक्रटरी और सीबीटी के सदस्य बृजेश उपाध्याय कहते हैं, 'CBT की मीटिंग में EPFO ने 8.5% ब्याज की घोषणा की थी, जो वह देगा। इसका उसके कॉरपस और भविष्य के रिटर्न्स पर क्या असर पड़ता है. वह अगले वर्ष पता चलेगा।'

ज्यादा रिटर्न पर सवाल
ज्यादा रिटर्न देने के लिए ऐसेट्स बेचने पर सवाल खड़े हो सकते हैं क्योंकि ऐसा करने से स्कीम के लॉन्ग-टर्म फ्यूचर पर असर पड़ेगा। वैल्यू रीसर्च के सीईओ धईरेंद्र कुमार कहते हैं, 'इन्वेस्टमेंट्स से मिलने वाले रिटर्न से ज्यादा रिटर्न तो सिर्फ पॉन्जी स्कीम्स ही देती हैं।' उन्होंने कहा कि जब इन्फ्लो आउटफ्लो की तुलना में ज्यादा होता है, तभी ऐसा होता है।
 
EPFO का तरीका गलत!
धीरेंद्र कुमार कहते हैं, ईपीएफओ ने अगस्त 2015 में जब इक्विटी में निवेश की शुरुआत की थी तब उसके इस फैसले का काफी स्वागत किया गया था। 2014 में जब स्टॉक्स में रैली देखी गई तो इसमें बहुत मौके देखे गे। EPFO ने निफ्टी ETF में 5% निवेश किया, जिसे 2017 में बढ़ाकर 10 फीसदी और 2018 में बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया। EPFO लॉन्ग टर्म मनी है लिहाजा इसका इक्विटी में निवेश करना अच्छा फैसला था। लेकिन समस्या तरीके में थी। EPFO ने हमेशा बॉन्ड और फिक्स्ड इनकम सिक्यॉरिटीज में निवेश किया और उनपर मिलने वाले रिटर्न के आधार पर ब्याज की घोषणा की। लेकिन मामला थोड़ा ट्रिकी हो जाता है जब इस समीकरण में इक्विटी को जगह दी जाती है। म्यूचुअल फंड और एनपीएस की तरह EPFO कॉरपस यूटिलाइज नहीं होता और निवेश की वैल्यू मार्केट मार्क्ड नहीं होती। ऐसे में नोशनल गेन्स के आधार पर ब्याज तय करना जोखिम भरा है। नवंबर 2017 में EPFO ने यूटिलाइजेशन प्लान अनाउंस किया जो ETF के तहत था, लेकिन वह लागू नहीं हो पाया।

कोविड-19 के लिए निकासी
EPF से तीन महीने की सैलरी या 75% रकम, जो कम हो उसे निकालने की स्कीम भी एक समस्या के रूप में सामने आई है। यहां समस्या यह है कि अगर EPF ने 7 फीसदी की दर से कमाई की है तो जो लोग पैसा निकाल रहे हैं उनको 8.5 फीसदी का ब्याज दिया जा रहा है। यानी उनके पैसों ने जितना कमाया, वे उससे ज्यादा ले रहे हैं। इसका असर उन लोगों पर दिखेगा जिमनका निवेश बना हुआ है।
 

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