खेल

आज ही इंग्लैंड पर बरसा था रिचर्ड्स का बल्ला, 30 साल बाद टूटा यह वर्ल्ड रिकॉर्ड

नई दिल्ली

सर विव रिचर्ड्स के तूफानी करियर के दौरान कई ऐसी पारियां रहीं, जो आज भी याद की जाती हैं. उनमें से एक सेंट जोंस की वह करामाती पारी है, जब उन्होंने अपने बल्ले का ऐसा जोर दिखाया कि रिकॉर्ड बन गया. उन्होंने 34 साल पहले इंग्लैंड के खिलाफ आज ही के दिन 1986 में करिश्माई शतक जमाया था.

वेस्टइंडीज के इस महान बल्लेबाज के लिए 15 अप्रैल का दिन बेहद खास है. इसी दिन रिचर्ड्स ने महज 56 गेंदों में शतक जड़ने का कारनामा किया था. इस कैरेबियाई सितारे के नाम टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज शतक (सबसे कम गेंदों में) का यह रिकॉर्ड 30 साल तक बरकरार रहा.

दरअसल, सेंट जोंस के एंटीगुआ रिक्रिएशन ग्राउंड पर रिचर्ड्स ने इंग्लैंड के गेंदबाजों को खिलौना बना डाला था और जैसा चाहा वैसा प्रहार किया. वह वेस्टइंडीज की दूसरी पारी में 58 गेंदों में 110 रनों की अविश्वसनीय पारी खेलकर नाबाद लौटे, जिसमें उनके 7 छक्के और इतने ही चौके शामिल रहे. रिचर्ड्स के धमाके के दो दिन बाद वेस्टइंडीज ने उस टेस्ट को 240 रनों से जीतकर सीरीज में इंग्लैंड का 5-0 से सफाया किया था.

टेस्ट मैचों में सबसे कम गेंदों में शतक पूरा करने की बात करें, तो पाकिस्तान ने दिग्गज मिस्बाह उल हक ने 2014 में रिचर्ड्स की बराबरी जरूर की, लेकिन वह उनके इस रिकॉर्ड को तोड़ नहीं पाए. आखिरकार 2016 में न्यूजीलैंड के धुरंधर ब्रेंडन मैक्कुलम ने 54 गेंदों में शतक जड़ दिया और 30 साल के बाद रिचर्ड्स का रिकॉर्ड टूटा.

टेस्ट क्रिकेट: सबसे तेज शतक (कम गेंदों में)

54 गेंद- ब्रैंडन मैक्कुलम (न्यूजीलैंड) विरुद्ध ऑस्ट्रेलिया, क्राइस्टचर्च, 2016

56 गेंद- विवियन रिचर्ड्स (वेस्टइंडीज) विरुद्ध इंग्लैंड, सेंट जोंस,1986

56 गेंद- मिस्बाह उल हक (पाकिस्तान) विरुद्ध ऑस्ट्रेलिया, अबु धाबी 2014

57 गेंद- एडम गिलक्रिस्ट (ऑस्ट्रेलिया) विरुद्ध इंग्लैंड, पर्थ 2006

हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व ऑलराउंडर शेन वॉटसन के साथ एक स्पोर्ट्स पॉडकास्ट के दौरान रिचर्ड्स से उनके करियर के सबसे खास पल के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ उस तेज पारी का नाम लिया. रिचर्ड्स ने कहा, 'एक बच्चे के रूप में घर में खेलना, द्वीप पर खेलना उसके बाद देश के लिए टेस्ट मैच खेलना, फिर शतक जड़ना, यह सब बहुत खास था.'

रिचर्ड्स ने कहा, 'एंटीगुआ में लोगों को समझाना बहुत मुश्किल होता है. वे रेडियो पर सुनते थे.., लेकिन वे कहते थे कि हम सुनना नहीं चाहते, देखना चाहते हैं. इसलिए अपने घरेलू मैदान पर ऐसा कुछ हासिल करना बेहद खास था. वह मेरे दिल के करीब था.'

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