मध्य प्रदेशराज्य

एमपी में बदली COVID-19 टेस्टिंग गाइडलाइन, सैंपल के साथ अब दर्ज होगी ये जानकारी

भोपाल
मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में कोरोना (Corona Virus) का ग्राफ लगातार तेजी से बढ़ता जा रहा है. मरीजों की बढ़ती संख्या अब 900 का आकड़ा छूने वाली है. ऐसे में हॉटस्पॉट (Hot spot) जिलों को जहां प्रशासन ने सील कर दिया है. वहीं अब स्वास्थ्य अमला (Health Department) भी घर-घर जाकर सर्वे करने में लगा है ताकी जांच पड़ताल कर संदिग्धों के जल्द सैंपल कलेक्ट किए जा सके. इन सर्वों में घर-घर जाकर स्वास्थ्यकर्मी प्रत्येक व्यक्ति की जानकारी जुटाने में लगे हैं. इन सर्वे में कोरोना के बढ़ते पॉजिटिव मामले और मौत के आंकड़ों को देखते हुए राज्य स्तर पर कुछ जरूरी बदलाव किए गए हैं.

सर्वे में सैंपल टेस्टिंग से लेकर कोरोना के संदिग्ध मरीजों के सर्वे के दौरान जानकारी दर्ज करने की व्यवस्था में कुछ बेहद जरूरी बातें जोड़ी गई हैं. इन्डियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च  से मिले दिशा निर्देशों के बाद मध्यप्रदेश में भी रणनीति में बदलाव किया गया है ताकि कोरोना के संक्रमण और मौत के बढ़ते आकड़ों पर लगाम कसी जा सके. जानकारी के बिन्दु क्या होंगे इसके लिए रैपिड रिस्पांस टीमों को ICMR ने दिशा निर्देश दे दिए हैं.

स्वास्थ्य आयुक्त की ओर से जारी आदेश के मुताबिक अब रेपिड रिस्पांस टीमों और अस्पतालों में सैंपल लेने वाले स्टाफ को ये आदेश दिए गए हैं कि वे संदिग्धों का सैंपल लेते समय उसकी पुरानी बीमारियों की जानकारी भी फार्म में जरूर दर्ज करें. अब तक हुई मौतों में अधिकांश मरीजज ओबेसिटी,डाईबिटीज, हाइपरटेंशन, अस्थमा ,कैंसर, टीबी जैसी बीमारियों से पीड़ित थे. इसके अलावा पॉजिटिव मरीज के संपर्क में आने वाले लोगों की जानकारी के साथ ही विदेश यात्रा या किसी अन्य राज्य की यात्रा की जानकारी आईसीएमआर के नए रेफरल फॉर्म में भरी जा रही है.

आईसीएमआर की ओर से जारी की गई गाइडलाइन में किए गए बदलावों के बाद अब लैब टेस्टिंग की व्यवस्था में भी कुछ बदलाव किए गए हैं. इनमें बीते महिनों  के अंदर विदेश यात्रा या किसी अन्य राज्य में यात्रा कर लौट कर वापस आने वाले सभी लोगों की जांच की जाएगी. लैब टेस्ट में कोरोना के पॉजिटिव केस के संपर्क में आने वाले लोगों की जांच कराई जाएगी. गंभीर सांस की बीमारी के साथ बुखार, कफ और सांस लेने में तकलीफ वाले सभी रोगियों के टेस्ट कराए जाएंगे. पॉजिटिव कोरोना केस के डायरेक्ट कान्टेक्ट में आए हाईरिस्क पेशेंट्स का सैंपल कलेक्शन के बाद 5 से 14 दिन के अंदर एक बार परीक्षण कराया जाएगा.

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