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महाराष्ट्र: न कोरोना पर कंट्रोल-न मजदूरों को भरोसा, उद्धव ठाकरे पर उठ रहे हैं सवाल

 
नई दिल्ली 

भारत में कोरोना पॉजिटिव मामलों की संख्या 11 हजार से ज्यादा हो गई है. देश में कोरोना का संक्रमण सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र से आ रहे हैं. महाराष्ट्र में कोरोना के केस बढ़कर 2687 हो गए हैं और मरने वाले लोगों का आंकड़ा 178 तक पहुंच गया है. वहीं, लॉकडाउन के बीच मुंबई में फंसे मजदूर-गरीब भी अपने घरों को वापस जाना चाहते है. ऐसे में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर सवाल उठने लगे हैं कि न तो वह कोरोना को कंट्रोल कर पा रहे हैं और न ही मजदूरों का भरोसा जीत पा रहे हैं.

महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण के मामले में देश में सबसे ज्यादा हालत खराब हैं. देश में कोरोना से मरने वाला हर दूसरा शख्स महाराष्ट्र से है और हर तीसरा शख्स मुंबई से है. इससे महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण के खतरों को समझा जा सकता है. मुंबई को चीन के वुहान शहर की तरह कोरोना संक्रमण का हॉटस्पॉट कहा जा रहा है. कोरोना मरीजों की संख्या मुंबई और महाराष्ट्र में बेतहाशा बढ़ रही है.
 
हालांकि, एक समय मुंबई से ज्यादा मामले केरल में थे, लेकिन वहां की राज्य सरकार ने काफी बेहतर तरीके से नियंत्रण किया है, जिसके चलते वहां पर काफी कम केस सामने आ रहे हैं जबकि उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र में कंट्रोल करने में सफल नहीं हो सके हैं. हालात ये हैं कि कोरोना वायरस धीरे-धीरे झुग्गियों में फैलता जा रहा है. एशिया की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी कही जाने वाली धारावी के अलावा अब कोरोना का संक्रमण बांद्रा टर्मिनस से सटे बेहरामपाड़ा और कुर्ला के जरीमरी आदि झुग्गियों तक फैल गया है. इससे उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं.

वहीं, दूसरी ओर महाराष्ट्र के मुंबई सहित तमाम शहरों में लॉकडाउन के चलते फंसे मजदूरों को भी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर भरोसा नहीं रहा है. इसका नजारा मंगलवार को उस समय दिखा जब पीएम मोदी ने 3 मई तक लॉकडाउन बढ़ाने की घोषणा के बाद ही अचानक मुंबई के बांद्रा स्टेशन पर हजारों की तादाद में मजदूरों की भीड़ उतरकर अपने गृहराज्य वापस जाने की मांग करने लगी थी. कोरोना संक्रमण के खतरों के बीच लॉकडाउन का भारी उल्लंघन सामने आया है, जिसके बाद पुलिस को लाठी चार्ज भी करना पड़ा.
 
हालांकि, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंगलवार की शाम को प्रवासी कामगारों को आश्वस्त करते हुए कहा था, आप अन्य राज्यों से यहां आकर रह रहे हैं तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है. महाराष्ट्र सरकार आपकी सारी व्यवस्था करेगी. लॉकडाउन का मतलब लॉकअप नहीं है. लॉकडाउन खत्म होते ही राज्य व केंद्र सरकार आपको आपके घर भेजने की व्यवस्था करेगी.

वहीं, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि बांद्रा में हुई घटना बहुत ही गंभीर है. हम पहले दिन से सरकार को बता रहे हैं कि जो प्रवासी मजदूर हैं जिनके पास राशन कार्ड नहीं है, उनकी व्यवस्था सरकार को करनी होगी. सरकार ये व्यवस्था करने में असफल रही है. बांद्रा जैसी जगह पर सरकार की नाक के नीचे इतने बड़े पैमाने पर मजदूर इकट्ठा होकर कहते हैं कि हमें या तो खाना दीजिए या तो वापिस जाने दीजिए. मैं सरकार से निवेदन करता हूं कि सबसे पहले ऐसे लोगों की सुध ले.

शिवसेना नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र में 6 लाख लोग शेल्टर्स में रह रहे हैं. केंद्र सरकार के सामने मामला रखा गया था कि इन लोगों को घरों तक पहुंचने की कोशिश की जाए. उनके पास खाना नहीं है और वे घर जाना चाहते हैं. बांद्रा में इकट्ठा हुए लोग अब चले गए हैं लेकिन यह स्थिति इसलिए हैं क्योंकि केंद्र सरकार ने बात नहीं सुनी. ये केंद्र सरकार की विफलता को दिखाता है, जो प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक भेजने में नाकाम हो रही है. आदित्य ठाकरे ने कहा कि मजदूर भोजन या आश्रय नहीं चाहते बल्कि वो घर जाना चाहते हैं. 
लॉकडाउन के वक्त मुंबई के बांद्रा रेलवे स्टेशन के पास हजारों प्रवासियों के एकत्रित होने को केंद्र ने गंभीरता से लिया है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को फोन पर इस घटना पर चिंता जताई और केंद्र से हर संभव मदद का आश्वासन दिया. शाह ने उद्धव से कहा कि अगर किसी भी स्तर पर कोई कोताही हुई तो कोरोना के खिलाफ लड़ाई कमजोर होगी और पूरा देश इसका जुर्माना भुगतेगा. ध्यान रहे कि पहले भी पुणे रेलवे स्टेशन पर इसी तरह भीड़ इकट्ठी हुई थी और आशंका गहरा गई थी. इस बार मुंबई में यही घटना हुई और सोशल डिस्टेंसिंग तार तार हुई.

दरअसल, भारत में सबसे ज्यादा कोरोना पॉजिटिव केस महाराष्ट्र से ही आ रहे हैं. ऐसे वक्त में मुंबई में ऐसी भीड़ वहां के सरकार और प्रशासन की नाकामी की ओर सवाल खड़े करती है. लॉकडाउन की घोषणा के बाद महाराष्ट्र सरकार या फिर प्रशासन उन मजदूरों को आश्वासन नहीं दे पाई जिसकी वजह से हजारों की तादाद में प्रवासी मजदूर वहां एकजुट हो गए. इस तरह से उद्धव ठाकरे न तो कोरोना को कंट्रोल कर पा रहे हैं और न ही मजदूरों का भरोसा जीत पा रहे हैं.

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