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एम्स में मरीज को ‘उल्टा’ कर किया गया कोरोना का इलाज

नई दिल्ली
 कोविड-19 (Covid-19) के शिकार लोकपाल के एक मेंबर पिछले कई दिनों से वेंटिलेटर पर थे। गंभीर स्थिति में थे। एम्स ट्रॉमा सेंटर ने प्रोन वेंटिलेशन तकनीक (prone ventilation technique for corona treatment) का इस्तेमाल किया, जिसका मरीज को इतना फायदा हुआ कि वो वेंटिलेटर से बाहर आ गए हैं। अब उनकी स्थिति पहले से बेहतर बताई जा रही है। एम्स ने कोविड मरीजों में पहली बार इस तकनीक का इस्तेमाल किया है।

एम्स ट्रॉमा सेंटर के मेडिकल सुप्रींटेंडेंट डॉक्टर अमित लथवाल ने बताया कि लोकपाल के मेंबर अब वेंटिलेटर से बाहर आ गए हैं। सेहत में काफी सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि उनके इलाज में प्रोन वेंटिलेटर तकनीक अपनाई गई, जिससे उनमें काफी फायदा देखा गया। डॉक्टर अमित ने कहा कि अभी एम्स ट्रॉमा सेंटर में 5 मरीज एडमिट हैं, जिसमें से अब सिर्फ एक मरीज वेंटिलेटर पर है।

क्या है प्रोन वेंटिलेटर तकनीक
प्रोन वेंटिलेटर तकनीक के बारे में आईसीयू एक्सपर्ट डॉक्टर रंजू सिंह ने बताया कि अमूमन यह तकनीक क्यूट रेसप्रेट्री डिसट्रेस सिंडोम में अपनाई जाती है। जब मरीज बहुत कमजोर होता है। गले में ट्यूब लगी होती है। लंग्स खराब होता है। उनमें में फ्लूड भरा होता है। ऐसी स्थिति में सही से ऑक्सिजिनेशन नहीं हो पाता। ऐसे मरीजों को प्रोन वेंटिलेशन दिया जाता है, इसमें मरीज को उल्टा कर लिटा दिया जाता है। इससे लंग्स में मौजूद फ्लूड इधर-उधर हो जाता है, जिससे लंग्स में ऑक्सिजन पहुंचने लगता है। हालांकि, मरीज में यह प्रोसस करना आसान नहीं होता है।

एम्स ट्रॉमा सेंटर में अभी कुल पांच मरीज एडमिट हैं, अब सिर्फ एक मरीज ही वेंटिलेटर पर हैं। यह मरीज न्यूरो के इलाज के लिए मेन एम्स आया था, जिसमें बाद में कोरोना पॉजिटिव पाया गया था। लोकपाल के इलाज में लंग्स की दवा का भी इस्तेमाल किया गया है। लोकपाल के मेंबर की बेटी भी अब एम्स ट्रॉमा सेंटर में ही एडिमट है। जानकारी के अनुसार लंदन में रहने वाली उनकी एक बेटी भारत आई हुई हैं, उनके संपर्क में आने की वजह से उनमें वायरस पॉजिटिव पाया गया। कुछ दिन बाद उनकी बेटी में भी संक्रमण की पुष्टि हुई और वो भी अब एम्स ट्रॉमा सेंटर में एडिमट हैं।

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