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खतरा: अनदेखी हुई तो कोरोना से ज्यादा मौत अन्य बीमारियों से संभव

 नई दिल्ली 
सरकार को डर है कि कोविड-19 प्रकोप से निपटने में अन्य गंभीर या जरूरी इजाज की अनदेखी से ज्यादा मौतें हो सकती हैं। इसलिए सरकारी जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक के लिए एक समग्र गाइडलाइन जारी की गई है। जिससे नवजात बच्चों, गर्भवती महिलाओं, गंभीर और खतरनाक रूप से कुपोषण का शिकार लोगों के अलावा कैंसर, एचआईवी, डायलिसिस, थैलेसीमिया, टीबी सहित विभिन्न रोगों में जटिल स्थिति को बचाया जा सके। 

ऐसे मरीजों की उचित निगरानी और फॉलो अप के लिए आशा कार्यकर्ताओं के जरिये सूची बनाने को कहा गया है। सरकार ने वर्ष 2014-15 में इबोला प्रकोप के वक्त की स्थिति का हवाला देते हुए कहा है कि उस समय खसरा, मलेरिया, एचआईवी – एड्स, टीबी आदि बीमारी की वजह से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। सरकार ने लोगों का स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति भरोसा बनाए रखने की जरूरत बताते हुए कहा है कि अन्य स्वास्थ्य हालात की वजह से  रोगियों की संख्या और मृत्यु नहीं बढ़नी चाहिए।

कई तरीकों से रखें नजर: 
वेब पोर्टल, टेलीपैथी, फोन पर सलाह, मोबाइल क्लिनिक के अलावा जरूरी होने पर घर तक इलाज पहुंचाने के लिए जरूरी अतिरिक्त कार्यबल की कमी सेवानिवृत्त चिकित्सक और नर्स की सेवा लेकर पूरा करने को कहा गया है। 

गर्भवती महिलाओं का तीन महीने तक का ब्योरा:  
आशा कार्यकार्ता को कहा गया है कि अपने इलाकों में तीन महीने तक कि अवधि में जन्म देने वाली गर्भवती महिलाओं की सूची तैयार करें जिससे उनको उचित तरीके से हेल्थ सेंटर से जोड़कर फॉलो अप किया जा सके।

अन्य इलाज के लिए उपयोग: 
कोविड इलाज के लिए तय ब्लॉक के अलावा स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में अन्य जरूरी गैर कोविड सेवाएं जारी रखने को कहा गया है। आयुष इंफ्रास्ट्रक्चर की भी मदद लेने को कहा गया है।

सावधानी के साथ करें उपाय: 
गाइडलाइन के मुताबिक सरकार चाहती है कि स्वास्थ्य अपेक्षाओं को पूरा करने में कोई कोताही ना हो। अस्पतालों में गैर जरूरी भीड़ से बचने के लिए जिन मामलों में संभव हो ऑनलाइन सलाह या प्राथमिक स्वास्थय केंद्रों के जरिये परामर्श का इंतजाम करने को कहा गया है। प्राथमिकता तय करके और इन्फेक्शन से बचने के सभी प्रबंधों के साथ स्वास्थ्यकर्मी मरीजों की देखभाल विभिन्न स्तरों पर सुनिश्चित करेंगे। कुपोषण के मामलों में पोषाहार पहुंचाने के लिए सूची बनाने को कहा गया है।

कई जगहों से अनदेखी का फीडबैक :
सूत्रों के मुताबिक सरकार को देश के अलग अलग हिस्सों से कोविड – 19 से निपटने में पूरा फोकस होने की वजह से अन्य स्वास्थ्य जरुरतो की अनदेखी का फीडबैक मिल रहा है। ये आशंका जताई गई है कि जिन मरीजों को निरंतर देखभाल की जरूरत है उन्हें समय पर इलाज न मिलने से जटिलता हो सकती है।

इन चुनौतियों पर नजर:  
कोविड-19 के प्रकोप में कई पहले से चली आ रही चुनौतियां पीछे छूट गई हैं। यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में नवजात बच्चों की मृत्यु दर की स्थिति बेहद चिंताजनक है। हर साल जन्म के 28 दिनों के भीतर 26 लाख बच्चे दम तोड़ देते हैं। इसमें से एक चौथाई यानी छह लाख बच्चे भारत के मौत के मुंह में समा जाते हैं। जन्म के बाद कुपोषण का शिकार होना या अन्य संक्रमण मौत की वजह बनती है। भारत में हर साल तकरीबन 11 लाख कैंसर के मरीज सामने आ रहे हैं। करीब सात लाख बच्चे हर साल कुपोषण की वजह से मौत का शिकार हो जाते हैं।

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