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 परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप, क्वारनटीन सेंटर में महिला की मौत

 
मुंबई 

मुंबई में भी कोरोना वायरस का कहर जारी है और वहां पर मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. खासकर धारावी में. राजीव गांधी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में क्वारनटीन की गई 55 साल की एक महिला की मौत के बाद विवाद शुरू हो गया है. परिजनों का आरोप है कि क्वारनटीन के दौरान लापरवाही के कारण महिला की मौत हो गई.
होटल प्रबंधन के छात्र सोहराब फारूकी के अनुसार, उसकी मां अंसारी बानो को स्ट्रोक का सामना करना पड़ा और अस्पताल पहुंचने से पहले उनकी मृत्यु हो गई. 25 साल के सोहराब ने मंगलवार को मां की मौत के बाद इसे सोशल मीडिया पर उठाया है.

परिवार समेत हुए क्वारनटीन
धारावी में 1 अप्रैल के बाद से कोरोना पॉजिटिव के 17 केस सामने आए जिसमें 8 की मौत हो गई. कोरोना के मामले में यह मुंबई के सबसे बुरी तरह से प्रभावित क्षेत्रों में से एक है. जी-उत्तर वार्ड में यह वायरस तेजी से फैल रहा है और लोगों को वायरस से बचाने के लिए क्वारनटीन किया गया है.

फारूकी परिवार के 9 सदस्य हाई रिस्क वाले एरिया में थे. उनके पड़ोसी के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद उन लोगों को क्वारनटीन कर लिया गया है.

सोहराब फारुकी का कहना है कि 10 अप्रैल की आधी रात के आसपास पुलिस और बीएमसी के चिकित्सा अधिकारियों की एक टीम हमारे पड़ोसी की तलाश में हमारे क्षेत्र में पहुंची. हालांकि वह पहले से ही सेवन हिल्स अस्पताल में भर्ती था. अधिकारियों ने हमें हाई रिस्क संपर्क में होने के कारण क्वारनटीन कैंप में शिफ्ट होने के लिए तैयार होने के लिए कहा. उसका कहना है कि हम अपने घर से सुबह 4 बजे क्वारनटीन शिफ्ट हुए.

फारूकी ने कहा कि उनके पिता, माता, भाई, भाभी, उनके बच्चे, 2 भतीजे और खुद वह स्पोर्टस कॉम्पलेक्स में बनाए गए क्वारनटीन सेंटर में चले आए. उसने बताया कि एक कमरे में 32 लोगों को रखा गया था. वहां दो शौचालय थे जिसमें एक महिलाओं के लिए और एक बच्चों के लिए थे. यह हाइजेनिक नहीं था. मेरी मां मधुमेह और ब्लड प्रेशर की बीमारी से पीड़ित थी जिसके कारण वह ठीक से चल भी नहीं पाती थीं.

मां को नहीं मिली सुविधाएं- फारुकी

फारूकी ने आगे आरोप लगाया कि उसे उसकी मां के लिए दवाइयां और व्हीलचेयर मुहैया नहीं कराई गई. उसने कहा कि हमें सुबह 4 बजे लाया गया और मां के लिए पर्याप्त दवाइयां नहीं मिलीं. हमें बाद में उसके लिए दवाइयां लाने की अनुमति नहीं दी गई और बीएमसी स्टाफ ने हमें सोमवार (13 अप्रैल) को उसकी दवा उपलब्ध कराई. उसी दिन रात में वह वॉशरूम गई, जो उसके लिए काफी दूर था और वहां से लौटते समय गिर गई.

फारुकी का आरोप है कि अधिकारियों को एक टैक्सी की व्यवस्था करने में आधे घंटे का समय लग गया. मां को सायन अस्पताल ले जाया गया जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया.

मौत की खबर रिश्तेदारों ने दी
उसका कहना है कि हमें अपने रिश्तेदारों से उनकी मौत के बारे में पता चला, जो सायन अस्पताल पहुंचे थे. हमारा टेस्ट 15 अप्रैल को दोपहर में लिया गया और शाम को हमें घर वापस भेज दिया गया. हमें जानवरों की तरह रखा गया और किसी ने भी यह नहीं कहा कि हमें क्या कहना है. मेरी मां हमारे सामने मर गई और हम कुछ नहीं कर पाए. उसे दौरा पड़ा, उसे पसीना आ रहा था और उनके मुंह से सफेद तरल पदार्थ निकल रहा था.

फारूकी ने एक और वीडियो बनाया जिसमें उसकी दो बहनों (अफशाना और फरजाना शेख) ने भी अधिकारियों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया. वीडियो में दोनों बहनें अपने नवजात शिशुओं को अपनी गोद में लिए नजर आ रही हैं.

अफसाना कह रही है कि मैंने अपने बच्चे के लिए साफ कपड़े और दवाई मांगी थी, लेकिन हमें नहीं मिला. उनकी बहन फरजाना ने कहा कि उनका बच्चा स्तनपान करने से मना कर रहा है. वह दूध नहीं पी रहा है. मैंने उसके लिए दवाई मांगी थी. सफाई नहीं होने के कारण मैं उसे नहला नहीं सकी.

फारूकी ने यहां तक कहा कि स्वास्थ्य अधिकारियों ने उनसे कहा कि झुग्गी बस्तियों में हम सार्वजनिक शौचालयों का उपयोग करते हैं और इसलिए वायरस फैल सकता है. हमारे घरों में अपने शौचालय हैं और हमें क्वारनटीन में वायरस के संपर्क में आने की आशंका ज्यादा है.

क्या कहता है MCGM
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (MCGM) का कहना है कि प्रोटोकॉल के अनुसार, वे लोग वायरस के हाई रिस्क जोन में थे, इसलिए कुछ को क्वारनटीन किया गया था. बाद में कुछ टेस्ट में पॉजिटिव भी पाए गए. हमने कैंप में उचित व्यवस्था की है. इस मामले में, डॉक्टर ने महिला की जांच की थी और दवा की सलाह दी थी. महिला को अस्पताल ले जाया जा रहा था और रास्ते में ही उसकी मौत हो गई. परिवार को अब घर भेज दिया गया है और उन्हें क्वारनटीन की सलाह दी गई है.

 

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