दुनिया

बेड पर बनियान में ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर रहा था वकील, जानें फिर क्या हुआ

 फ्लोरिडा। 
भारत ही नहीं, दुनिया भर के तमाम देशों में इस समय अदालती मामलों की सुनवाई वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये चल रही है। फ्लोरिडा में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान ऐसी ही सुनवाई के दौरान लापरवाही वकील को भारी पड़ी।

दरअसल, वकील सुनवाई के दौरान बेड पर बैठा था और बनियान पहने हुआ था। जूम पर हुई इस सुनवाई के दौरान वकील को ऐसी हालत में देख जज भड़क गए और उन्होंने वकील को पूरी वेशभूषा में ही बहस के लिए आने को कहा। ब्रोवार्ड सर्किट कोर्ट के जज डेनिस बैले ने इसके बाद बार एसोसिएशन को वेबसाइट के जरिये एक पत्र मेल किया, जिसमें कहा गया है कि टेलीकान्फ्रेंसिंग के दौरान कोई छूट नहीं दी जाएगी।

अदालती परिसर की तरह वकीलों को पूरे पहनावे में और डिकोरम में रहना होगा। वकीलों का कैजुअल शर्ट, बाथिंग शूट, महिलाओं का घर के पहनावे में सुनवाई में पेश होना बर्दाश्त नहीं होगा। बेडरूम की जगह उचित जगह से ही ऑनलाइन सुनवाई में शामिल हों। टीशर्ट, जींस में नजर आए तो कार्रवाई होगी।

सोशल डिस्टेंसिंग पर 2022 तक अमल जरूरी
कोरोना वायरस के मौसमी उभार की आशंका को देखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग से जुड़े उपायों पर साल 2022 तक अमल करना जरूरी हो सकता है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपने हालिया विश्लेषण के आधार पर यह दावा किया है।

स्टीफन किसलर के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कोरोना के मौसमी उभार, उसके खिलाफ मौजूद प्रतिरोधक क्षमता और टीकाकरण के जरिये वायरस से मुकाबले की संभावनाओं को परखते हुए भविष्य का अनुमान लगाया। उन्होंने साफ किया कि कोरोना की मौजूदा लहर के भविष्य में काबू में आने के बावजूद समस्या हल नहीं होगी। सर्द तापमान में वायरस लगातार सिर उठाता रहेगा। और चूंकि, अभी कोरोना का कारगर इलाज खोजने में समय लगेगा, इसलिए संक्रमण को दोबारा महामारी बनने से रोकने के लिए 2022 तक दीर्घकालिक या फिर-फिर टुकड़ों-टुकड़ों में सोशल डिस्टेंसिंग लागू करनी पड़ेगी।

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