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लॉकडाउन में बेजुबानों की मदद, राजनांदगांव के दो बच्चे हर दिन खिला रहे कुत्तों को खाना

राजनांदगांव
कोरोना वायरस (Corona Virus) की वजह से लगे लॉकडाउन (Lock down) में लोगों के साथ जानवारों को भी परेशानी हो रही है. गलियां पूरी सूनी हो रखी हैं. अब इन जानवारों को खाना देने लोग अपने घरों से बाहर भी नहीं निकल रहे हैं. लॉकडाउन में लोगों की मदद सरकार कर रही है तो वहीं इन बेजुबनों की मदद के लिए कुछ बच्चे आगे आए हैं. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के राजनांदगांव (Rajnandgaon) जिले के दो बच्चे लॉकडाउन में रोजाना जानवरों की मदद करते हैं. शहर के कक्षा नौवीं के छात्र अंशुल और कक्षा दसवीं के छात्र रविंद्र ने लॉकडाउन में कुत्तों को खाना खिलाने का बीड़ा उठाया है.

शहर के इन दो बच्चों के साथ पीटीएस में पदस्थ सूबेदार मनीष राजपूत और महेश भी मदद कर रहे हैं. अपनी स्वेछा से ये लोग रोज अंडों को उबलते हैं और चावल में मिलाकर कौरीन भट्ठा, कमला कॉलेज, गौरव पथ, अनुपम नगर, आरके नगर, औद्योगिक क्षेत्र और शहर के अन्य स्थानों में भूखे कुत्तों को खिला रहे हैं. लगभग 100 से अधिक कुत्तों को इनके द्वारा प्रतिदिन खाना खिलाया जा रहा है. बच्चों की इस पहल से अब इन कुत्तों को हर रोज खाना मिल रहा है.

राजनांदगांव शहर के अंशुल सिंह 9वीं कक्षा की पढ़ाई कर रहे हैं. इस बच्चे ने देखा की शहर में लॉकडाउन के दौरान जानवारों को दिक्कतें आ रही है. लोगों को तो जिला प्रशासन द्वारा राशन उपलब्ध करा दिया जा रहा है. कई समाजसेवी संस्था द्वारा गायों को घास भी खिला दिया जा रहा है लेकिन शहर के आवारा कुत्तों को खाना खिलाने कोई नहीं था. इसके बाद अंशुल ने इन कुत्तों को रोज खाना खिलाने का बीड़ा उठाया.

अंशुल के मुताबिक रोज घर पर अंडा और चावल बनाया जाता है. फिर अंडे और चावल को मिक्स करके शहर के आवारा कुत्तों के लिए खाना तैयार किया जाता है. फिर अपने दोस्त रविंद्र के साथ हर दिन कुत्तों को खाना खिलाया जाता है. दोनों बच्चे सुबह-शाम कुत्तों को खाना खिला रहे हैं. इन बच्चों का कहना है कि भूखे कुत्तों को खाना खिलाने में बहुत खुशी मिलती है. उनका कहना है कि शहर के लोग भी ऐसा सोचे तो कोई जानवर भूखा नहीं रहेगा. एसडीएम मुकेश रावटे ने कहा कि मेरी जानकारी में है ये. सोशल मीडिया के जरिए मुझे जानकारी मिली थी.

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