मध्य प्रदेशराज्य

समर्थन मूल्य पर रबी फसल की खरीदी का आज दूसरा दिन : मंडी को किसानों का इंतज़ार

भोपाल
मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर रबी फसल की खरीदी का आज दूसरा दिन है. मंडी को आज फिर किसानों का इंतज़ार रहेगा.किसानों की उपज का एक – एक दाना खरीदने के संकल्प के साथ मध्य प्रदेश में 15 अप्रैल से समर्थन मूल्य पर रबी फसल की सरकारी खरीद शुरू हो चुकी है. लेकिन पहले दिन खरीददारी ठंडी रही. कोरोना से बचाव के तमाम इंतज़ामों और एहतियात के बावजूद किसान अपनी फसल बेचने नहीं पहुंचे. मंडी खाली पड़ी रहीं.

खरीदी के पहले दिन जबलपुर जिले के अधिकांश केन्द्रों में किसानों का इंतज़ार होता रहा.लेकिन सुबह से दोपहर तक कोई भी किसान अपनी उपज लेकर नहीं पहुंचा. पहले दिन 153 खरीदी केन्द्रों को खोला गया है. इनमें सोशल डिस्टेंसिंग के साथ गेंहू की खरीदी होना है. सुबह से ही निर्धारित समय पर सरकारी अधिकारी ओर वेयरहाउस संचालक पहुंच गए थे लेकिन कोई किसान पहली पाली में नहीं आया.

कोविड संक्रमण के कारण खरीदी केन्द्रों में मास्क और सेनेटाइज़र की व्यवस्था की गई थी. जिला प्रशासन आगामी दिनों मे खरीदी केन्द्रों की संख्या को बढ़ा सकता है.कहने को पूर्व में करीब 180 खरीदी केन्द्र खोलने की बात प्रशासन ने कही थी. इसे जरूरत पड़ने पर बढ़ाया जा सकता है. प्रदेश सरकार ने 1925 रूपए प्रति क्विंटल की दर से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद की शुरूआत बुधवार से कर दी है.

खरीदी केन्द्रों में कोरोना फ्री प्लान के तहत व्यवस्था की गई है. बड़ी संख्या में प्रशासनिक अमला तैनात किया गया है. इसमें वन विभाग, राजस्व और पुलिस का अमला शामिल है. गौरतलब है कि प्रत्येक खरीदी केन्द्रों में प्रतिदिन 6 किसानों से ही समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी का आदेश है. इसे दो पालियो मे बांटा गया है.

सागर जिले में गेहूं खऱीदने के लिए 156 केंद्र बनाए गए हैं. जिलों में समितियों के माध्यम से खरीद की जाएगी. तहसीलों में भी खरीदी केन्द्र बनाए गए हैं.खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम की ओर से प्रतिदिन 6 किसानों को एसएमएस भेजे जाएंगे.जिन किसानों को एसएमएस मिलेगा सिर्फ उन्हें ही खरीद केंद्र आना होगा. उन्हीं से गेहूं खरीदा जाएगा.

सागर जिले में निर्धारित गेहूं उपार्जन केन्द्र पर सभी मूलभूत सुविधाएं 15 अप्रैल से पहले सुनिश्चित करने के कलेक्टर के आदेश के बाद भी खरीदी शुरू नहीं हुई.रहली में मंडी के शेड सूने पड़े रहे.जिन समितियों को खरीदी करना है उनके केंद्र संचालक भी नदारद थे. न तो सचिव और पटवारी खरीदी केंद्रों पर पहुंचे.खरीदी केंद्रों को सेनेटाइज किया जाना है. लेकिन मास्क और सेनेटाइजर की व्यवस्था यहां नहीं दिखी.

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