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COVID-19 के बीच धान पर राजनीति शुरू, BJP ने सीएम भूपेश बघेल से की ये मांग

रायपुर
कोरोना काल (Corona Virus) में पूरी दुनिया इस बात की जुगत में जुटी है कि कैसे इस भीषण संकट से उबरा जाए, कैसे इस महामारी को नियंत्रित किया जाए, कैसे इस इससे खुद को, परिवार को और समाज को बचाया जाए. इतना ही नहीं संकट के इस घड़ी में लोग एक दूसरे के मदद को भी आगे आ रहे हैं, चाहे  मुख्यमंत्री राहत कोष हो या फिर प्रधानमंत्री लोग बढ़चढ़ कर दान दे रहे हैं. स्थिति यह है कि छोटे-छोटे बच्चे अपने गुल्लकों को भी सरकार के हवाले कर कोरोना से लड़ाई में हाथ बटां रहे हैं. इस विषय परिस्थितियों में धान का कटोरा (Paddy Purchase) कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में धान के नाम पर एक बार फिर सियासत (Politics) शुरू हो गई है.

दरअसल, नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखकर टोकनधारी किसानों के धान खरीदी के लिए निर्देश जारी करने की मांग की है. इस पर जवाब देते हुए कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह ने नेता प्रतिपक्ष सहित बीजेपी को उनके 15 साल का कार्यकाल याद दिलाते हुए किसानों के साथ किए गए अन्याय की याद दिलाई.

धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में धान और किसान हमेशा से ही राजनीति के केंद्र बिन्दु रहे हैं. यहीं वजह है कि कोरोना महामारी के समय में भी इस मुद्दें पर राजनीति शुरू हो गई है. दरअसल, नेता प्रतिपक्ष ने सीएम को पत्र लिख इस बात की जानकारी दी कि जिन किसानों के धान नहीं बिके थे या जो किसान धान नहीं बेच पाए थे मुख्यमंत्री के एलान के बाद उन किसानों को 19 फरवरी को टोकन जारी किया गया था. मगर तय समय बाद धान बेचने के लिए कहा गया था.

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उन्हें प्रदेश के अलग-अलग जिलों से इस बात के फोन आ रहे हैं कि धान खरीदी केंद्रों पर किसानों के धान नहीं खरीदे जा रहे हैं जिससे उन्हें आर्थिक रूप से परेशान होना पड़ रहा है. नेता प्रतिपक्ष ने सीएम से मांग करते हुए लिखा की इस बाबत तत्काल निर्देश जारी कर किसानों को राहत पहुंचाना का कार्य किया जाए.

नेता प्रतिपक्ष के पत्र पर कांग्रेस की ओर से संचार विभाग के वरिष्ठ सदस्य और प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा कि जो बीजेपी 15 सालों तक सरकार चलाने के दौरान कभी किसान हित में निर्णय नहीं आज वह किसानों के प्रति मगरमछ के आंसू बहा रही है. प्रवक्ता आरपी सिंह ने यह भी कहा कि अगर नेता प्रतिपक्ष को पत्र लिखना ही है तो फिर प्रधानमंत्री को पत्र लिखें. प्रधानमंत्री से मांग करें की किसानों के खाते में पैसा जमा कराए. प्रधानमंत्री से मांग करें कि किसानों के द्वारा उपार्जित धान से बने चावल खरीदी का कोटा बढ़ाए.

छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद से करीब 20 साल बाद भी धान और किसान के नाम पर राजनीति जारी है. प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी के शासन काल में शुरू हुई धान की खरीदी में बीजेपी ने ऐसी अव्यवस्था का आरोप लगाया कि इसकी गूंज विधानसभा चुनाव 2018 तक सुनाई देती रही कि कांग्रेस की सरकार में किसानों के धान को पानी में डुबो-डुबो को देखा जाता था. तो वहीं कांग्रेस 2003 में सत्ता से बेदखल होने से लेकर साल 2018 तक पूरे पंद्रह सालों तक बीजेपी सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाते रही. धान को किसान को लेकर राजनीति भले ही 20 से चली आ रही हो मगर यह जमीनी सच्चाई है कि आज भी किसानों की स्थिति जस की तस है.

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