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Covid-19: पश्चिम बंगाल सरकार पर राज्यपाल ने उठाए सवाल, ममता ने दिया जवाब

 कोलकाता/नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सरकार पर एक बड़ा आरोप लगाया है। धनखड़ ने कहा कि राज्य सरकार निगेटिव सोच के साथ काम कर रही है और कोरोना वायरस की गंभीरता को समझ नहीं रही है। धनखड़ ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार केंद्र की ओर से दी गईं टेस्टिंग किट्स का सही तरह से उपयोग नहीं कर रही है और उनकी संख्या के बारे में भी लोगों को गुमराह कर रही है।
इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राजभवन को सलाह दी कि इस संकट के समय वह राजनीति से दूर रहे। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हमें अर्धसैनिक बलों की क्यों जरूरत है? कई ऐसे मामले आए हैं, जब सैन्य बल के जवान स्वयं कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। कुछ लोग परेशानी में राजनीतिक लाभ उठाना चाहते हैं। मैं सभी का आह्वान करूंगी कि यह राजनीति का समय नहीं है। यह संकट का समय है।’

राज्यपाल धनखड़ ने कहा कि पश्चिम बंगाल में पहले से स्थिति काफी अस्त-व्यस्त थी, लेकिन अब वह और अत्यधिक खराब होती जा रही है क्योंकि राज्य सरकार लॉकडाउन को ठीक से लागू नहीं कर रही है। राज्यपाल का यह भी आरोप है कि राज्य में मेडिकल कर्मचारी विशेषतः भारी दबाव में काम कर रहे हैं।

CM ममता ने लगाए केंद्र सरकार पर आरोप
इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस पार्टी ने बड़े ही स्पष्ट तरीके से राज्यपाल के आरोपों का खंडन करते हुए उन्हें 'आधारहीन' बताया है। तृणमूल कांग्रेस के बड़े नेताओं ने केंद्र सरकार पर बिना तैयारी के लॉकडाउन की घोषणा करने का आरोप लगाया। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ने अन्य राज्यों में फंसे हुए बंगाल के प्रवासी मजदूरों के लिए पर्याप्त काम नहीं किया है। अभी हाल में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया था कि केंद्र ने राज्य को पर्याप्त टेस्ट किट्स, मेडिकल उपकरण और प्रयोगशालाओं के लिए अप्रूवल नहीं दिया है।

गवर्नर का आरोप- संसाधनों का सही यूज नहीं हो रहा
धनखड़ ने दावा किया कि टेस्टिंग किट्स की कोई कमी नहीं है और अभी भी ICMR के पास 27 हजार टेस्टिंग किट्स का स्टॉक है। उन्होंने कहा, 'राज्य को 5000 किट्स दी गईं हैं। राज्य ने उन्हीं किटों को अब तक बांटा नहीं है। ICMR NICED को पूर्वी क्षेत्र के लिए 42,500 किट दी गई हैं। राज्य में सबसे अच्छी तरह से सुसज्जित संगठन एनआईसीईडी (NICED) को ही टेस्टिंग के लिए पर्याप्त मात्रा में सैंपल्स नहीं दिए गए हैं। फिलहाल समय की सबसे बड़ी मांग यह है कि उपलब्ध संसाधनों का सही से इस्तेमाल किया जाए, जो राज्य में फिलहाल नहीं किया जा रहा है।'

धनखड़ ने राज्य सरकार के उस निर्णय की निंदा की है जिसके अनुसार राज्य ने एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई है जो यह जांच करती है कि संबंधित व्यक्ति की मौत कोरोना से हुई है या नहीं। धनखड़ ने कहा, 'ऑडिट टीम का कॉन्सेप्ट डॉक्टर्स के लिए काफी हानिकारक है क्योंकि टीम को यह जांच करनी पड़ती है कि संबंधित व्यक्ति की मौत कोरोना से हुई है या नहीं।'
 

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