बिलासपुर

भुवनेश्वर के नंदन कानन से बिलासपुर कानन पेंडारी पहुंची दो मादा हिप्पोपोटामस

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भुवनेश्वर स्थिन नंदन वन जू से दो मादा हिप्पोपोटामस लेकर कानन का दल शनिवार की रात पहुंचा और इस तरह अब में हिप्पोपोटमस की संख्या बढ़कर चार हो गई है। जू प्रशासन ने संक्रमण व सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दोनों हिप्पोपोटमस को लगभग 20 दिन तक अलग तालाब में रखा है ताकि दूसरे जवान संक्रमित न हो सकें, बाद में उन्हें बड़े तालाब में अन्य हिप्पोपोटमस के साथ छोड़ा जाएगा।

जू में मादा हिप्पोपोटामस लाने की तैयार एक साल से चल रही थी। इसके लिए भुवनेश्वर जू से वन्य प्राणियों की अदला- बदली के तहत सहमति भी बनी। इस बीच भुवनेश्वर जू प्रबंधन द्वारा यहां से लायन जोड़ा ले गया। पर कुछ न कुछ अड़चनों की वजह से कानन प्रबंधन हिप्पो नहीं ला सका। पहले कोरोना के कारण अड़ंगा हुआ। इसके बाद जब कुछ तैयारी होने के बाद दल रवाना हुआ तो उन्हें दस्तावेज की कमी के कारण बीच रास्ते से लौटकर आना पड़ा। हालांकि दस्तावेज की कमी पूरा करने के साथ ही दोबारा तैयारी में प्रबंधन जुटा हुआ था। सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 18 फरवरी की सुबह टीम को भुवनेश्वर के लिए रवाना किया गया। दो वाहन में अलग- अलग पिंजरे के साथ टीम 19 फरवरी की रात को उन्हें लेकर पहुंची।

कानन पहुंचने के बाद दोनों को पीछे बनाए गए अलग केज में छोड़ा गया है। 20 दिन तक उन्हें यहीं रखा जाएगा इसके बाद उन्हें कानन पेंडारी जू के नर हिप्पोपोटामस गजनी और छोटू के साथ रखा जाएगा। भुवनेश्वर स्थिन नंदन वन जू से दो मादा हिप्पोपोटामस स्वस्थ्य है। एक जू कर्मचारी को तैनात कर उन पर नजर रखने के लिए कहा गया है। दूसरे जू से आने के कारण यह सतर्कता बेहद जरूरी है।

हिप्पोपोटामस को 600 किमी दूर लाना किसी चुनौती से कम नहीं था। जू प्रबंधन ने इसके लिए खास इंतजाम भी किया था। इसके तहत दोनों ट्रक में एक- एक ड्रम पानी भरकर रखे थे। रास्तेभर एक कर्मचारी लगातार हिप्पो के शरीर में पानी डाल रहा था। मालूम हो कि यह प्रजाति दिनभर पानी में रहता है, जरा सी गर्मी इन्हें बर्दाश्त नहीं होती। इन्हीं उपायों का असर है कि दोनों सुरक्षित कानन पेंडारी जू तक पहुंच गए।

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