बिलासपुर

झीरम घाटी हत्याकांड मामले में हाईकोर्ट हुआ सख्त, 12 अगस्त के बाद नहीं बढ़ेगी सुनवाई की तारीख

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आठ वर्ष पूर्व हुए झीरम मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अपना सख्त रूख अख्तियार करते हुए कहा कि 12 अगस्त के बाद इस मामले की आगे तरीख नहीं दी जायेगी। मंगलवार को हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से मौजूद सहायक सॉलीसीटर जनरल रमाकांत मिश्रा ने कोर्ट से समय मांग लिया। जिस पर कोर्ट ने यह व्यवस्था दी।

सहायक सॉलीसीटर जनरल रमाकांत मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली में मौजूद अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी जो इस मामले में केंद्र सरकार की तरफ से पैरवी करने वाले हैं वह सुप्रीम कोर्ट के किसी केस में व्यस्त है। इसलिए मामले की सुनवाई बढ़ा दी जाए।केंद्र सरकार के वकील की ओर से एक बार फिर समय मांगे जाने का जितेंद्र मुदलियार के वकील संदीप दुबे ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि मामले पर लगातार बढ़ रही सुनवाई के कारण जितेंद्र मुदलियार को न्याय मिलने में देर हो रही है। आखिर में कोर्ट ने मामले को 12 अगस्त के लिए बढ़ा दिया।  कोर्ट ने सुनवाई बढ़ाने के साथ ही कहा कि 12 तारीख के बाद अब मामले पर कोई भी अगली डेट नहीं दी जाएगी।

झीरम कांड में दिवंगत कांग्रेस नेता व पूर्व विधायक उदय मुदलियार के बेटे जितेंद्र मुदलियार ने जून 2020 में दरभा थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। उनकी रिपोर्ट पर पुलिस ने धारा 302 और 120 के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया था। जितेंद्र ने एफआईआर में कहा है कि एनआइए ने इस घटना में राजनीतिक षड्यंत्र की जांच ही नहीं की है। उन्होंने झीरम मामले की जांच राज्य सरकार के अधीन जांच एजेंसी को सौंपने की मांग उठाई है। दरभा थाने में दर्ज इस रिपोर्ट को चुनौती देते हुए एनआइए ने अपनी विशेष अदालत में याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। जिसके बाद इस फैसले के खिलाफ एनआइए ने हाईकोर्ट में आपराधिक अपील प्रस्तुत की है । इसमें कहा गया है कि एनआइए केंद्रीय स्तर की जांच एजेंसी है , जिसकी जांच हो चुकी है । ऐसे में राज्य शासन को अधिकार नहीं है कि फिर से उसी प्रकरण में अपराध दर्ज कराया जाए । वहीं इस एफआइआर मामले पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने पिछले दिनों पुलिस द्वारा आपराधिक प्रकरण की जांच पर रोक लगाई हुई है। इधर इस मामले में जितेंद्र मुदलियार ने हाईकोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर की है । इसमें बताया है कि झीरम हमला सामान्य नक्सली घटना नहीं है बल्कि इसे राजनीतिक षड्यंत्र के तहत अंजाम दिया गया है ।

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