उत्तर प्रदेशराज्य

बिना काम कराए हो गया करोड़ों का भुगतान, बीडीओ सहित चार पर डीएम ने द‍िया एफआइआर का न‍िर्देश

गोरखपुर
बिना काम कराए ही करोड़ों रुपये का भुगतान हो जाने के मामले में सहजनवा के पूर्व खंड विकास अधिकारी दुर्योधन, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अवर अभियंता सुबोध कुमार तिवारी, लघु सिंचाई के अवर अभियंता अजय कुमार एवं लेखाकार राघवेंद्र पाठक पर एफआइआर दर्ज कराई जाएगी। जिलाधिकारी विजय किरन आनंद के निर्देश के बाद मुख्य विकास अधिकारी इंद्रजीत सिंह ने एफआइआर के लिए पुलिस विभाग को लिखा है। एफआइआर दर्ज कराने के बाद जिलाधिकारी ने इस मामले में विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।

शिकायत पर तीन सदस्यीय टीम से कराई गई जांच में हुई अनियमितता की पुष्टि
जिलाधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी ने एक अप्रैल 2022 को सहजनवा ब्लाक के सभाकक्ष में सहजनवा, पाली एवं पिपरौली ब्लाक में कराए गए विकास कार्यों की समीक्षा की थी। उसी दौरान क्षेत्र पंचायत सदस्य के प्रतिनिधि एवं विशुनपुरा के निवासी मनोज कुमार दुबे व ग्राम वसिया निवासी धनंजय सिंह ने जिलाधिकारी से अनियमितता की शिकायत की थी। दोनों शिकायतकर्ताओं ने बताया था कि सहजनवा ब्लाक में बीडीओ, जेई एवं जनप्रतिनिधि द्वारा बिना काम कराए ही करोड़ों रुपये का भुगतान करा लिया गया है। शिकायत के बाद तत्कालीन बीडीओ दुर्योधन को सहजनवा से हटा दिया गया था। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने 12 अप्रैल को जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिला ग्राम विकास अभिकरण के सहायक अभियंता को संयुक्त रूप से जांच का जिम्मा दिया था।

टीम ने मौके पर जाकर क‍िया न‍िरीक्षण
टीम द्वारा 11 एवं 12 मई को कार्यों का स्थलीय सत्यापन किया गया। मौके का निरीक्षण करने के बाद शिकायतकर्ता की शिकायत प्रथम दृष्टया सही पायी गई। मौके पर 15 में से 10 कार्य कराए ही नहीं गए थे। अन्य पांच काम हाल ही में कराए गए हैं। काम अधोमानक मिले। स्थानीय लोगों, रोजगार सेवक, प्रधान आदि ने बताया कि काम निरीक्षण से दो दिन पहले कराए गए हैं जबकि अभिलेखों के अनुसार भुगतान नवंबर 2021 में ही कर दिया गया था।

होगी विस्तृत जांच
जांच टीम ने 13 मई को जिलाधिकारी के समक्ष जांच आख्या प्रस्तुत कर दी। एफआइआर के साथ ही जिलाधिकारी ने इस मामले की विस्तृत जांच कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में धन के गलत भुगतान, कार्ययोजना तैयार कर कार्यपूर्ति दिखाकर सरकारी धन का गबन करने में किसकी-किसकी संलिप्तता है, जिन चेकों के माध्यम से भुगतान लिया गया हे, उसपर किसके हस्ताक्षर हैं आदि बिन्दुओं पर जांच विस्तृत जांच की जरूरत है।

किसी को नहीं लगी फर्जीवाड़े की भनक
बीडीओ व अन्य कर्मियों की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा होता रहा लेकिन किसी उच्च अधिकारी को इसकी भनक नहीं लगी। जिलाधिकारी के समक्ष शिकायत नहीं हुई होती तो यह मामला दबा रह जाता। इस प्रकरण के बाद जिले के अन्य ब्लाकों में भी इस तरह की जांच की जरूरत महसूस की जाने लगी है।

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