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कोरोना ड्यूटी में अपने घर-परिवार को भी भूल गईं दिल्ली पुलिस की महिला IPS शालिनी सिंह

नई दिल्ली 

पश्चिमी रेंज की महिला आईपीएस संयुक्त पुलिस आयुक्त शालिनी सिंह दिन-रात घर जाने का नाम नहीं ले रही हैं। यह सब सिर्फ इसलिए कि उनकी नजर अपने तीन जिलों से हटते ही कहीं कोरोना की कमर और चेन तोड़ने में जाने-अनजाने कोई चूक न हो जाए।दिनभर खुद जुटकर पुलिस वालों से जरूरतमंदों की मदद कराने के बाद भी उनके चेहरे पर थकान की शिकन दूर-दूर तक नहीं दिखती। इस सबके बाद रात के वक्त फिर सरकारी कार में ड्राइवर और वायरलेस ऑपरेटर को लेकर अचानक सड़कों पर उतर जाना। जब से देश में लॉकडाउन लागू हुआ तब से यही शालिनी सिंह का रुटीन है।लॉकडाउन के दौरान दिनभर जरूरतमंदों के लिए भोजन-पानी का इंतजाम करवाना। थाने में ड्यूटी के बाद जो भी महिला-पुरुष पुलिसकर्मी चाहें, उनसे गरीबों के लिए खाना तैयार कराकर बंटवाना। पूरे दिन सोशल डिस्टेंसिंग फॉलो नियम हो रहा है या नहीं आदि जांचना। उसके बाद स्वेच्छा से मास्क बनाने में जुटी महिला पुलिस कर्मियों का उत्साहवर्द्धन करना उनका रोज का काम हो गया है। 

 

कोरोना से जरूर जीत जाएंगे

दिन-रात घर से बाहर रहने पर थकतीं नहीं है? 22-23 दिन के लॉकडाउन में अभी तक कभी तो इतना काम करने के बाद बोरियत या परेशानी महसूस हुई होगी। इस बारे में पूछने पर शालिनी सिंह ने कहा कि भूख-प्यास, थकान, बोरियत, आलस, नींद आदि… यह सब जब आप चाहेंगे तभी आप पर हावी हो जाएंगे। मैं इन सबकी परवाह इसलिए नहीं कर रही हूं, कि आज नहीं तो कल सही, कोरोना से जीत जाएंगे। आराम तो उस वक्त भी कर लिया जाएगा। आज का जरा सा आलस या लापरवाही या फिर अपनी निजी ख्वाहिशें पूरी करना समाज के लिए भारी पड़ सकता है।

 

पुलिसकर्मियों को प्रोत्साहन चाहिए 

उन्होंने एक सवाल के जबाब में कहा कि मैं मानती हूं कि द्वारका, बाहरी और पश्चिमी जो तीनों जिले मेरे अधीन हैं, उनमें पुलिसिंग सुपरवीजिन मुझे करना है। इसके अलावा मानवीय दृष्टिकोण से भी और सीनयर होने के नाते भी मेरी बहुत जिम्मेदारी बनती है। जो सबऑर्डिनेट स्टाफ दिन-रात कोरोना की इस मुसीबत में ग्रांउड जीरो पर जूझ रहा है, उसे और कुछ नहीं सिर्फ प्रोत्साहन चाहिए। मुझे अच्छा लगता है कि जब मैं स्टाफ के बीच या किसी थाने-चौकी में या फिर जहां पुलिसकर्मी सहयोगी भावना से कुछ काम कर रहे होते हैं, वहां मैं भी पहुंच जाती हूं। सिर्फ और सिर्फ पुलिस अफसर होने के नाते नहीं। मानवीय दृष्टिकोण से भी यह मेरी जिम्मेदारी बनती है। 

 

स्वेच्छा और सेवा भाव है जरूरी

 

आपके कुछ जिलों में महिला पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान और फिर स्वैच्छिक रूप से ड्यूटी के आगे पीछे के वक्त में भी समर्पण भाव से मास्क बनाने के काम में भी युद्धस्तर पर जुटी हैं। 10-12 घंटे की ड्यूटी के बाद यह सब कैसे संभव हो पा रहा है? यह पूछने पर संयुक्त पुलिस आयुक्त शालिनी सिंह ने कहा कि जब हम हों या आप कोई काम स्वेच्छा और सेवा भाव से करते हैं तो फिर वो वजन नहीं लगता। न उसमें थकान का अहसास होता है। इसे काम कहिए या फिर जिम्मेदारी, रोजाना एक हजार से भी ज्यादा मास्क बना कर द्वारका जिले की महिला पुलिस कर्मी बखूबी निभा रही हैं। दिन-रात मास्क बनाने का काम पुलिसकर्मियों की देखरेख में ही पीएमकेवीवाई के तहत दिल्ली पुलिस द्वारा संचालित युवा सेंटरों पर हो रहा है। इन सेंटरों पर मैं पुलिसकर्मियों के बीच खुद ही अक्सर पहुंच रही हूं, ताकि वे इस नेक कार्य को करने के लिए स्व-प्रोत्साहित होते रहें। 

 

शराब तस्करों पर है पुलिस की नजर

आपके अधीन आने वाले द्वारका, बाहरी और पश्चिमी तीनों जिलों की सीमाएं हरियाणा बॉर्डर से जुड़ी हैं। क्या आपके इलाके में सबसे ज्यादा शराब तस्करी इसीलिए हो रही है? यह पूछे जाने पर शालिनी सिंह ने कहा कि शराब तस्करी की कोशिश हो रही है, शराब तस्करी हो नहीं रही है। हरियाणा की सीमा से तस्कर घुसने की कोशिश करते ही हमारे बॉर्डर के थानों की पुलिस तस्करों को पकड़ कर उनकी सब मेहनत पर पानी फेर दे रही है। द्वारका जिले का बाबा हरिदास नगर थाना इसका सर्वोत्तम उदाहरण है। यहां मेरे रेंज में जहां तक मुझे पता है कि शराब तस्करों के खिलाफ सबसे ज्यादा मुकदमे दर्ज हुए हैं।

 

अब जब पुलिस को अधिकार मिल गया है कि वो शराब तस्करी में इस्तेमाल होने वाले वाहन को भी हमेशा के लिए जब्त कर ले। आपके सीमांत थाना इलाकों में पुलिस इंतजाम भी काफी हैं। इसके बाद भी शराब तस्कर प्रवेश की कोशिश कैसे कर जाते है? उन्हें उम्मीद होती है कि लॉकडाउन में कोई ध्यान नहीं देगा। साथ ही शराब तस्कर, तस्करी के लिए अपने दिमाग से तो बहुत ही नायाब तरकीब पुलिस की आंख में धूल झोंकने के लिए अपना रहे हैं। जैसे एक शराब तस्कर घरेलू कुकिंग गैस सिलेंडर में ही शराब ले जाते पकड़ा गया। हां यह जरूर है कि पुलिस की सख्ती से बौखलाए कई शराब तस्करों ने हमारी नाका-टीमों पर ही अपना वाहन चढ़ाने की कोशिशें तक कीं। सिर्फ इसलिए कि जैसे-तैसे वे लोग शराब तस्करी की उम्मीद में निकलते हैं। उस पर भी दिल्ली पुलिस पानी फेर देती है।शालिनी सिंह के मुताबिक, शराब तस्करी समस्या दिल्ली की नहीं है। यह समस्या दिल्ली पुलिस के लिए ज्यादा है। दरअसल दिल्ली में शराब हरियाणा या उत्तर प्रदेश से लाकर बेचे जाने की कोशिशें होती हैं। यह ज्यादा मुश्किल है। 

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