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WPR की रिपोर्ट में दावा- चीन को पछाड़ दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बना भारत

 नई दिल्ली  

दुनिया में सबसे ज्यादा आबादी के मामले में भारत अब चीन को काफी पीछे छोड़ चुका है। विशेषज्ञों का यह दावा है। उनका मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी आबादी के लिए अधिक से अधिक रोजगार पैदा करने चाहिए ताकि भारत अपना विकास तेज रफ्तार से जारी रख सके। वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू (डब्ल्यूपीआर) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत जनसंख्या के मामले में दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश चीन को काफी पीछे छोड़ चुका है। वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू, जनगणना और जनसांख्यिकी पर केंद्रित एक स्वतंत्र संगठन है। इसके मुताबिक, 2022 के अंत तक दक्षिण एशियाई राष्ट्र भारत की जनसंख्या 1.417 बिलियन (140 करोड़ से ज्यादा) थी।

यह चीन की संख्या से 50 लाख ज्यादा है। चीन ने मंगलवार को अपनी जनसंख्या 1.412 बिलियन बताई थी। चीन की आबादी में वर्ष 1961 के बाद पहली बार कमी दर्ज की गई है। भारत की आधी आबादी 30 वर्ष से कम आयु की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनने के लिए तैयार है। हालांकि अपनी युवा आबादी का अधिकतम लाभ उठाने के लिए, मोदी सरकार को हर साल लाखों लोगों के लिए रोजगार सृजित करने की आवश्यकता है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि देश कृषि से जुड़ी नौकरियों से दूर हो रहा है।

भारत को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने जताया था अलग अनुमान

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र ने अनुमान जताया था कि भारत इस साल के अंत तक जनसंख्या के मामले में चीन से आगे निकल जाएगा। संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग (जनसंख्या प्रभाग) द्वारा विश्व जनसंख्या संभावना 2022 की हालिया रिपोर्ट में अनुमान व्यक्त किया गया है कि भारत 2023 में दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाले देश के रूप में चीन को पछाड़ देगा। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2050 में भारत की आबादी 1.668 अरब होने का अनुमान है, जो इस सदी के मध्य तक चीन की अनुमानित 1.317 अरब की आबादी से अधिक है।

डब्ल्यूपीआर के अनुसार, 18 जनवरी तक, भारत की जनसंख्या पहले ही 1.423 अरब हो चुकी है। डब्ल्यूपीआर के अलावा, रिसर्च प्लेटफॉर्म मैक्रोट्रेंड्स का अनुमान है कि भारत की जनसंख्या 1.428 बिलियन है। गौरतलब है कि महामारी संबंधी व्यवधानों के कारण भारत ने 10 साल में एक बार होने वाले अपने जनसंख्या सर्वेक्षणों को स्थगित कर दिया था। पहले भारत अपनी जनगणना 2021 में करने वाला था। 

मोदी सरकार पर नौकरियां पैदा करने का दबाव 

सशस्त्र बलों के लिए अग्निवीर योजना इस बात का उदाहरण है कि सरकार पर नौकरियां पैदा करने का दबाव है। इस योजना के तहत सैनिकों के कार्यकाल को चार साल तक सीमित किया गया है। सरकार के इस कदम ने प्रशासन पर नौकरियों के सृजन और सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान के दबाव को दर्शाया है। 2024 में फिर से सत्ता पर काबिज होने की तैयारी में जुटी मोदी सरकार अर्थव्यवस्था में विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) की हिस्सेदारी को मौजूदा 14% से बढ़ाकर 25% करने पर जोर दे रही है।

कोरोना महामारी से पहले और फिर उसके बाद मजबूती से रिकवरी करते हुए भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ी है। लेकिन एक सच्चाई ये भी है कि देश के लगभग 80 करोड़ लोग अभी भी सरकार से मुफ्त राशन पर निर्भर हैं। यह दुनिया में अपनी तरह का सबसे बड़ा कार्यक्रम है।

खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भर है भारत

भारत अभी एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। भारत के लिए अच्छी बात यह है कि देश खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भर है। यह चावल, गेहूं और चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। एक बाजार के रूप में, भारत अपने बढ़ते मध्यम वर्ग के साथ, खाद्य तेलों का शीर्ष आयातक होने के साथ-साथ चीनी का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। यह सोने और स्टील का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता और कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा खरीदार है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा घरेलू विमानन बाजार भी है।

हालांकि भारत की जनसंख्या वृद्धि धीमी हो गई है। WPR को उम्मीद है कि यह संख्या कम से कम 2050 तक बढ़ती रहेगी। दूसरी ओर, चीन वर्तमान में एक जनसंख्या में गिरावट देख रहा है। राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, एक साल पहले की तुलना में 2022 में चीन की जनसंख्या 850,000 कम हो गई। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि 2022 और 2050 के बीच वैश्विक जनसंख्या में अनुमानित वृद्धि का आधे से अधिक केवल आठ देशों में केंद्रित होगा: कांगो, मिस्र, इथियोपिया, भारत, नाइजीरिया, पाकिस्तान, फिलीपींस और तंजानिया।
 

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