रायपुर

माता-पिता व गुरुजनों के चरणों में सरस्वती का वास होता है, माता पिता अपने बच्चों की खुशहाली और तरक्की के लिए तन, मन और धन से हमेशा प्रयत्नशील रहते है। वे चाहते हैं कि उनके बच्चे मुकाम पर पहुंचे, यदि बच्चे उस मुकाम तक नहीं पहुंच पाते तो उन्हें निराश नहीं होना चाहिए बल्कि उन्हें दोगुनी शक्ति के साथ उस कार्य को करना चाहिए जिससे कि उसमें उन्हें सफलता मिले। ये विचार कचहरी चौक स्थित राष्ट्रीय विद्यालय में वार्षिक उत्सव समारोह के मुख्य अतिथि नगर निगम के सभापति प्रमोद दुबे ने छात्रों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने सफल छात्रों को पुरस्कार से भी नवाजा। जो बच्चे भगवान रामचंद्र के जीवन चरित्र को आत्मसात करते हुए अपने माता पिता के चरण को छुकर स्कूल जाते हैं वे ही जीवन में उच्च पदों को प्राप्त कर पाते हैं क्योंकि माता पिता व गुरुओ के चरणों में सरस्वती का वास होता है।

उन्होंने कहा कि जिन बच्चो को पुरूस्कार मिला तथा जिनको नहीं मिला वे दोनों अपने में अन्तर को स्वयं समझे। आपके माता-पिता आपके लिए 14 घंटे मेहनत करते हैं, उनकी आकांक्षा होती है कि उनके बच्चे कलेक्टर, एसपी या आईपीएस अधिकारी बने। उन्होंने बताया कि इस विद्यालय से पढ़कर बच्चे आज उच्च पदों पर आसीन है। बच्चे गिली मिट्टी की तरह होते हैं, बचपन में उन्हें जिस प्रकार का आकार दिया जाता है वे उसमें परिवर्तित होते हैं। इसलिए बच्चों के साथ ही माता-पिता तथा गुरुजनों को यह समझना चाहिए कि बच्चे में किस प्रकार की अभिरुचि है जिसे की जागृत किया जाए।
कार्यक्रम में खेल प्रतियोगिताओं मे विजयी हुए बच्चों को पुरस्कृत किया गया। इस दौरान विद्यालय के बच्चों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय विद्यालय समिति के अध्यक्ष श्री अजय तिवारी, सचिव अनिल गुप्ता, उपाध्यक्ष मदन लाल तालेड़ा, रूपचंद श्रीश्रीमाल, कार्यकारिणी सदस्य श्री गोवर्धन दास डागा,  पी आर गोलछा,  हिन्दू हाई स्कूल के प्राचार्य श्री देशमुख एवं छतोद मे राष्ट्रीय विद्यालय के प्राचार्या श्रीमती हेमलता रेड्डी, राष्ट्रीय विद्यालय रायपुर के प्राचार्य पी डी दीवान एवं शिक्षकगण सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित थे।

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