पांडू पिंडारा में क्यों करते हैं पिंडदान? जानें पांडवों और पिंडतारक तीर्थ से जुड़ी मान्यता
जींद पांडू पिंडारा(पिंडतारक तीर्थ) का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। मान्यता है, महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने भगवान श्री कृष्ण के कहने पर कौरवों और सैनिकों की आत्मा की शांति के लिए यहां पिंडदान किया था। यहां सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा करते हुए 12 वर्ष बिताए थे और पूर्ण विधान से पिंडदान […]
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