प्रयागराज
कानपुर बवाल के बाद अटाला में बवाल की पटकथा लिखी गई। तैयारी पूरी थी। बवाल के दौरान कश्मीर जैसा दृश्य दिखा। कश्मीर जैसा ही पथराव। बच्चों को आगे करके पुलिस पर पथराव कराया गया। क्रिकेट का बैट-बल्ला पकड़ने वाले अटाला के छोटे-छोटे बच्चे शुक्रवार को जुमे की नजाम के बाद पथराव कर रहे थे। उनके हाथों में पत्थर थमा दिया गया था। बदले की भाषा बोल रहे थे। उन्हें पता भी नहीं होगा कि वे क्या कर रहे हैं लेकिन जैसे ही खाकी सामने दिख रही थी, सामने से पथराव करने लग रहे थे। यह सीन हैरान कर देने वाला था।
पुलिस अफसरों की बात छोड़िए, सिपाही और पैरामिलिट्री के जवान भी उनकी हरकतें देखकर हैरान थे। देखते ही देखते कई पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। बच्चों के पथराव करने पर पुलिसकर्मी बच रहे थे और बेटा-बेटा चिल्ला रहे थे। पुलिसकर्मी बोल रहे थे कि बेटा क्या कर रहे हो, उधर से निडर होकर ईंट चला रहे थे। ये हाल अटाला के चारों गलियों का था। उन्हीं गलियों का था, जहां पर सैकड़ों की संख्या में पहुंचे लड़कों ने बच्चों को मोहरा बनाकर बवाल किया। सब कुछ समझ में आ रहा था। अचानक इन बच्चों के पास इतने ईंट-पत्थर कहां से आ गए। उनमें आग किसने जलाई। बच्चों को सामने लाकर बवाल करने की साजिश एक दिन में नहीं रची गई होगी।
जानकारों का कहना है कि कानपुर में हुए बवाल के बाद सभी ने शांति की अपील की थी लेकिन यहां आग लगाने की साजिश रची जा रही थी। धीरे-धीरे छोटे-छोटे बच्चों को तैयार करके बवाल के लिए सामने ला दिया। जैसे ही बच्चों ने पथराव किया तो पुलिस भड़क उठी। लाठी चार्ज करना पड़ा। इसके बाद माहौल बिगड़ता चला गया।
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