भोपाल
भोपाल नगर निगम के अधीन आने वाले पार्कों के रखरखाव में हर साल 15 करोड़ राशि खर्च की जा रही है। बीते तीन साल में उद्यानिक मेंटेनेंस के नाम पर करीब 45 करोड़ खर्च किए गए। इसके बावजूद निगम के अधीन आने गार्डन बदहाल हैं। खास बात यह हैं कि अधिकांश पार्कों से बच्चों के खेलने के लिए लगाए गए झूले गायब हो चुके हैं। यह देख कर कहना गलत नहीं होगा कि उद्यानिक शाखा के जिम्मेदार अफसर मिट्टी और पौधों पर करोड़ों रुपए खपाकर निगम प्रशासन को करोड़ों रुपयों का चूना लगा रहे हैं। शहर के कुछ चुनिंदा पार्कों की हालत देखकर इनके मेंटेनेंस का अंदाजा लगाया जा सकता है।
स्वामी विवेकानंद थीम पर पार्क सूख गए पौधे और घांस
अशोका गार्डन स्थित 80 फिट रोड पर नगर निगम प्रशासन ने लाखों रुपए खर्च करके स्वामी विवेकानंद थीम पर पार्क बनाया था। जो कि रखरखाव के अभाव में बदहाल हो चुका है। आलम यह हैं कि यहां लगे पौधों को पानी तक नसीब नहीं हो रहा। इस कारण पौधे और घांस सूख चुकी है।
प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री के नाम से बना पार्क हुआ जर्जर
मप्र के प्रथम मुख्यमंत्री पंड़ित रवि शंकर शुक्ल के नाम पर बना पार्क पूरी तरह जर्जर हो गया है। जिसका अनावरण पूर्व मुख्यमंत्री द्वारका प्रसाद मिश्र के कर कमलों से किया गया था। अब फिर से इस पार्क को जीर्णोंद्धार का इंतजार है। बच्चों के खेलने के लिए लगाए गए झूले यहां गायब हो चुके हैं।
गंदगी से पटा यातायात पार्क
नगर निगम डवलप किया गया यातायात पार्क गंदगी से पटा हुआ है। यहां गंदगी के कारण पार्क बद से बदतर हो गया है। पार्क में सैलानियों के लिए कुछ नहीं है। रखरखाव के अभाव में चारों तरफ सिर्फ गंदगी की गंदगी पसरी हुई है।
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