नई दिल्ली
सेना की नई भर्ती योजना अग्निपथ के विरोध के बीच रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार अपने निर्णय से पीछे हटने वाली नहीं है। सेना में अग्निपथ योजना के अंतर्गत भर्तियां की जाएंगी। डिफेंस्ट मिनिस्ट्री की ओर जारी बयान में कहा गया है कि सेना भर्ती को लेकर लिए गए निर्णय से पीछे हटने के सवाल ही नहीं बनता। 'अग्निपथ' सेना भर्ती योजना को लेकर देशभर हुए हिंसक विरोध बीच रक्षा मंत्रालय साफ कर दिया है कि केंद्र सरकार अब अपने फैसले से हटने वाली नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि सियाचिन और अन्य क्षेत्रों जैसे क्षेत्रों में 'अग्निवर' को वही भत्ता मिलेगा जो वर्तमान में सेवारत नियमित सैनिकों पर लागू होता है और रुपये का मुआवजा मिलता है। जवानों के शहीद होने पर 1 करोड़ रुपये भी दिए जाएंगे। लेकिन केवल अग्निपथ योजना से ही भारतीय सेना में भर्तियां होंगी।
सेना के उच्च अधिकारियों ने कही ये बात
अग्निपथ योजना के तहत भर्ती को लेकर पहले ही स्थिति स्पष्ट की जा चुकी है। सेना के वाइस एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने कहा है कि इस साल 21 नवंबर से पहला नौसैनिक अग्निवीर की पहला बैच ओडिशा के चिल्का ट्रेनिंस सेंटर में पहुंचना शुरू हो जाएगा। यहां महिला और पुरुष दोनों श्रेणी के अग्निवीरों के ट्रेनिंग की व्यवस्था है। वहीं लेफ्टिनेंट जनरल बंसी पोनप्पा ने बताया कि दिसंबर के पहले सप्ताह तक सेना को 25 हजार 'अग्निवर' का पहला बैच मिलेगा। जबकि दूसरा बैच फरवरी 2023 के आसपास शामिल किया जाएगा। इसके बाद कुल मिलाकर 40,000 अग्निवीर हो जाएंगे। एयर मार्शल एसके झा ने कहा कि 24 जून से अग्निवीर बैच नंबर 1 पंजीकरण प्रक्रिया और 24 जुलाई से चरण 1 ऑनलाइन परीक्षा प्रक्रिया शुरू होगी। पहला बैच दिसंबर तक नामांकित होगा और प्रशिक्षण 30 दिसंबर तक शुरू जाएगा।
अग्निपथ पर आशंकाओं पर जनरल अरुण पुरी ने कही ये बात
सैन्य मामलों के विभाग के अतिरिक्त सचिव लेफ्टिनेंट जनरल अरुण पुरी ने कहा कि अगर वह राष्ट्र की सेवा में अपना जीवन बलिदान करते हैं तो अग्निवरों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजे का प्रावधान है। वहीं सेवानिवृत्ति के बाद की चिंताओं पर उन्होंने कहा कि हर साल लगभग 17,600 लोग तीनों सेवाओं से समय से पहले सेवानिवृत्ति ले रहे हैं। अगले कुछ समय में 4-5 वर्षों में सैनिकों का वेतन 50 से 60 हजार होगा जो बाद में बढ़करक 1 लाख तक पहुंच जाएगा।
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