नई दिल्ली
अर्थव्यवस्था के लिए सतर्क आशावादी दृष्टिकोण रखते हुए एमपीसी के सदस्य जयंत आर वर्मा ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव और कमोडिटी (जिंस) की ऊंची कीमतें लंबी अवधि तक बने रहने के बावजूद 2022-23 और 2023-24 के लिए आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं तर्कसंगत हैं।
आरबीआई के मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्य जयंत आर वर्मा ने कहा कि महामारी मौद्रिक प्रणाली के लिए सबसे बड़ी परीक्षा थी। भारतीय अर्थव्यवस्था इस प्रकोप से मुश्किल से ही उबर पाई है। ऐसे में हमें सावधान रहते हुए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उच्च महंगाई पर अचानक काबू पाने की कोशिश में आर्थिक वृद्धि का असहनीय बलिदान न हो।
अर्थव्यवस्था के लिए सतर्क आशावादी दृष्टिकोण रखते हुए वर्मा ने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव और कमोडिटी (जिंस) की ऊंची कीमतें लंबी अवधि तक बने रहने के बावजूद 2022-23 और 2023-24 के लिए आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं तर्कसंगत हैं। बढ़ती महंगाई पर काबू पाने के दबाव में आरबीआई ने कठोर रुख अख्तियार किया है। रेपो दर में इस साल मई से अब तक 0.90 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। इससे रेपो दर दो साल के उच्च स्तर 4.90 फीसदी पर पहुंच गई है।
उच्च वृद्धि की राह पर लौटने में लगेगा समय
वर्मा ने कहा, वैश्विक अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में दुनिया को उच्च वृद्धि की राह पर वापस आने में कुछ समय लगेगा।
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