सुप्रीम कोर्ट ने BCCI संविधान संशोधन मामले में हरीश साल्वे को वर्चुअली उपस्थित होने की दी अनुमति

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नई दिल्ली
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड, बीसीसीआइ के संविधान में संशोधन के मुद्दे पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। इसको लेकर खबर आ रही है कि सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे को सुनवाई के दौरान वर्चुअली उपस्थित होने की अनुमति दे दी है। बीसीसीआइ के इस कूलिंग आफ के प्रावधान को स्वीकृति मिलती है या नहीं अब यह कोर्ट तय करेगा। इस फैसले पर ही निर्भर करेगा कि बीसीसीआइ अध्यक्ष सौरव गांगुली और सचिव जय शाह अपने पद पर बने रहेंगे या उन्हें जाना होगा। दरअसल एक वकील द्वारा बेंच से बुधवार को होने वाले इस सुनवाई को फिजिकल मोड में करने की अपील की गई थी जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने साल्वे को वर्चुअल तरीके से उपस्थित होने की अनुमति दे दी है। वकील द्वारा इस बात की जानकारी देते हुए कहा गया कि कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता साल्वे को वर्चुअल तरीके से उपस्थित होने की अनुमति दे दी है।

मालूम हो कि बीसीसीआइ ने 2019 में अपनी वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बिना ही संविधान संशोधन किया था और इसे लागू कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया वे कहा था कि उन्होंने इसके लिए 2 साल पहले ही आवेदन कर दिया था लेकिन कोविड के कारण इसकी सुनवाई नहीं हो सकी थी। इससे पहले जस्टिस आरएम लोढ़ा के नेतृत्व वाली समिति ने बीसीसीआई में सुधार की सिफारिश की थी जिसे शीर्ष अदालत ने स्वीकार कर लिया था। सिफारिशों के अनुसार, राज्य क्रिकेट संघ या बीसीसीआई स्तर पर एक पद समाप्त होने के बाद छह साल के कार्यकाल के बाद बीसीसीआई के पदाधिकारियों के लिए तीन साल की कूलिंग आफ अवधि होनी चाहिए।

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