नई दिल्ली
कुल 24 राज्यों और सात केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) ने पुलिस कदाचार (Police Misconduct) की शिकायतों की जांच के लिए निवारण तंत्र पर पुलिस शिकायत प्राधिकरण (Police Complaints Authorities) का गठन किया है, गृह मंत्रालय (एमएचए) ने मंगलवार को लोकसभा में यह जानकारी दी है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के सांसद असदुद्दीन ओवैसी द्वारा उठाए गए एक सवाल का लिखित जवाब देते हुए साझा किया।
इन राज्यों में किया गया पुलिस शिकायत प्राधिकरण का गठन
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मंत्री ने कहा, अरुणाचल प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, दिल्ली, जम्मू और कश्मीर, लक्षद्वीप और पुडुचेरी ने पुलिस शिकायत प्राधिकरण का गठन किया है।
मंत्री ने आगे कहा कि 'पुलिस' भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची -1 (राज्य सूची) में आने वाला राज्य का विषय है और यह प्राथमिक रूप से राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की जिम्मेदारी है कि पुलिस बल को कुशल बनाया जाए। और इसकी कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी और पारदर्शी हो। राय ने कहा कि राज्यों के पुलिस बल 'मामले में मौजूदा कानूनी और संस्थागत ढांचे के भीतर ही काम करते हैं'। 1996 की रिट याचिका (सिविल) 310 के मामले में प्रकाश सिंह और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य के मामले में अपने फैसले के परिणामस्वरूप, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों / केंद्रशासित प्रदेशों को पुलिस शिकायत प्राधिकरण स्थापित करने का निर्देश दिया। यह जवाब तब आया जब ओवैसी ने पूछा था, 'क्या गृह मंत्री उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नाम बताने की कृपा करेंगे जिन्होंने पुलिस कदाचार की शिकायतों की जांच के लिए निवारण तंत्र पर अब तक पुलिस शिकायत प्राधिकरण का गठन किया है।'
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