भोपाल
प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं नवकरणीय ऊर्जा संजय दुबे ने पर्यावरण परिसर में ऊर्जा उत्पादन से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिये अत्याधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण का शुभारंभ किया। दुबे ने कहा कि भारत एक विकासशील देश है। हम ऊर्जा सुरक्षा के साथ पर्यावरण सुरक्षा की चुनौतियों का सामना करते हुए लगातार आगे बढ़ रहे हैं। पर्यावरण सुरक्षा की अत्याधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल के साथ हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि देश की आर्थिक स्थिति के मद्देनजर यह तकनीकें कारगर होने के साथ अधिक महँगी भी न हो।
प्रमुख सचिव पर्यावरण अनिरूद्ध मुखर्जी, सदस्य सचिव मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अच्युतानंद मिश्र और इंटरनेशनल सेंटर फॉर सस्टेनेबल कार्बन की प्रोजेक्ट मैनेजर डॉ. लेसली स्लॉस ने भी संबोधित किया। अंतर्राष्ट्रीय विषय-विशेषज्ञों द्वारा दिये जा रहे प्रशिक्षण में प्रदेश के थर्मल पावर, ऊर्जा और पर्यावरण से जुड़े लोग भी भाग ले रहे हैं।
प्रथम सत्र में डॉ. लेसली स्लॉस ने कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में सीईएमएस की भूमिका, रिपोर्ट और शोध, आईसीएससी के प्रधान कंसलटेंट संजीव कुमार कंचन ने भारत के संदर्भ में सीईएमएस की मूल बातें, अनुभव और चुनौतियाँ पर व्याख्यान दिया। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व सदस्य सचिव जे.एस. कामयोत्रा ने भारत में सीईएमएस के दिशा-निर्देश, उपकरण चयन, उपयुक्तता आदि पर व्याख्यान दिया। दूसरे सत्र में डॉ. आर. सियान वॉर्डन ने सीईएमएस के क्वालिटी एश्योरेंस एण्ड कंट्रोल यूएसए सिस्टम और रोनाल्ड जे़टेक ने यूरोपीयन सिस्टम की जानकारी दी। तीसरे सत्र में कामयोत्रा ने सीईएमएस में प्रयोगशालाओं की भूमिका, नौकरियाँ, अधिमान्यता, डेविड ग्राहम ने सीईएमएस के अनुभव, नियम, नये ट्रेंड, क्रियान्वयन आदि की जानकारी दी। जेफ रेयान ने भी अनुभव, नियम, तकनीकी और योजनाओं के कार्यान्वयन पर जानकारी दी।
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