नई दिल्ली।
छत्तीसगढ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और वरिष्ठ नेता टी.एस. सिंहदेव के बीच झगड़ा बढ़ता जा रहा है। दोनों नेताओं द्वारा अपने-अपने पक्ष में विधायकों की लामबंदी की कोशिशों से कांग्रेस नेतृत्व नाराज है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व जल्द दोनों नेताओं को दिल्ली तलब कर सकता है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, प्रदेश प्रभारी पी.एल. पुनिया ने घटनाक्रम के बारे में पार्टी नेतृत्व को रिपोर्ट दी है। छत्तीसगढ़ विधानसभा सत्र से पहले हुए इस घटनाक्रम ने भाजपा को सरकार को घेरने का मौका दे दिया है।
सीएम नहीं बनाने से सिंददेव नाराज
वरिष्ठ नेता सिंहदेव की नाराजगी को ढ़ाई-ढाई साल मुख्यमंत्री वाला फार्मूला लागू नहीं होने से उनकी नाराजगी से जोडकर देखा जा रहा है। सिंहदेव लगातार पार्टी नेतृत्व पर उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग करते रहे हैं। हालांकि पार्टी ऐसे फार्मूले से इनकार करती रही है। प्रदेश सरकार में वरिष्ठ मंत्री के तौर पर टीएस सिंहदेव के पास पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग और स्वास्थ्य मंत्रालय था। सिंहदेव ने पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग से इस्तीफा दे दिया है। पार्टी के एक नेता के मुताबिक, इस झगड़े को जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।
भाजपा के अविश्वास प्रस्ताव की नोटिस ने बनाया दबाव
इस बीच, विधानसभा में भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ दिए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस ने कांग्रेस पर दबाव बना दिया है। विश्वासमत के प्रस्ताव पर 27 जुलाई को चर्चा होगी। ऐसे में पार्टी चर्चा से पहले झगड़ा खत्म करना चाहती है।
भाजपा की सेंधमारी का भी डर
छत्तीसगढ विधानसभा में कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्याबल है। कुल 90 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के पास 71 और भाजपा के पास 14 सदस्य हैं। पार्टी के एक नेता ने कहा कि बहुमत से ज्यादा अहम अपने विधायकों को एकजुट रखना है। ताकि भाजपा सेंध न लगा सके।
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