रायपुर
कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर नरेन्द्र भुरे की अध्यक्षता में कलेक्टोरेट परिसर स्थित सभाकक्ष में समय-सीमा की बैठक आयोजित की गई। उन्होंने राज्य शासन द्वारा स्वंतत्रता सप्ताह (11 अगस्त से 17 अगस्त) के दौरान 'हर घर झंडा कार्यक्रम' के सफल क्रियान्वयन के संबंध में जारी दिशा निर्देश का पालन सुनिश्चित करने अधिकारियों को निर्देशित किया एवं इस संबंध में अधिकारियों से आवश्यक तैयारी की जानकारी ली।
कलेक्टर डॉ भुरे ने विभागीय अधिकारियों से कहा कि लंबित आवेदनों का निराकरण समय-सीमा में कर आमजनों को योजनाओं का लाभ दिलाए। प्रशासन का लक्ष्य आमजनों की सेवाओं से जुड़ा है। उन्होंने गोधन न्याय योजना के तहत खरीदे गए गोबर, वर्मी कम्पोस्ट निर्माण एवं विक्रय की प्रगति के संबंध में नगरीय निकायवार समीक्षा की। उन्होंने नगरीय निकायों के अधिकारियों से कहा कि गौठानों में उपलब्ध वर्मी खाद् की विक्रय में तेजी लाए तथा सोसायटी के अधिकारी-कर्मचारी से सतत् संपर्क बनाए रखे। वर्मी खाद् का तेजी से खपत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गोधन न्याय योजना शासन की महत्वपूर्ण योजना है, इसमें लापारवाही ना बरते। उन्होंने नगरीय निकायों के अधिकारियों से बारिश के मौसम में जलभराव की स्थिति, रोड-नाली की साफ-सफाई, ब्लीचिंग पाउडर छिड़काव आदि के संबंध में निर्देशित करते हुए सभी एस.डी.एम को वार्डवार दौरा करने कहा।
डॉ भुरे ने जनचौपाल और लोकसेवा गांरटी अधिनियम के लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता से निराकरण करने अधिकारियों को निर्देशित किए। उन्होंने अनुविभागवार प्रत्येक प्रकरणों की समीक्षा की। कलेक्टर ने रोका-छेका अभियान के क्रियान्वयन की जानकारी लेकर अधिकारियों को निर्देशित किया। उन्होंने खाद्य विभाग के अधिकारी से एफ.सी.आई ने चांवल जमा करने की स्थिति की जानकारी लेकर तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी एस.डी.एम को अपने-अपने क्षेत्र के मिलर्स की बैठक लेने कहा। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारी से जिले में खाद्-बीज की पर्याप्त उपलब्धता की जानकारी ली।
कलेक्टर ने राजस्व विभाग के अधिकारियों से समय-सीमा अंतर्गत निराकृत किए जाने प्रकरणों, स्लम पट्टों पर भूमि स्वामी अधिकार संबंधी आवेदनों का निराकरण, शासकीय भूमि का आबंटन, व्यवस्थापन, नजूल भूमि आबंटन/व्यवस्थापन एवं आबादी पट्टा को फ्री होल्ड करना, निकायों की संपत्ति विक्रय से प्राप्त आय की स्थिति, रेन वॉटर हारवेस्टिंग की सिस्टम की स्थापना, अवैध निर्माण का नियमितीकरण, आवासीय भूमि पर व्यवसायिक गतिविधियों का नियमितीकरण, व्यवसायिक भूखंडों का विकास एवं भूमि विक्रय आदि के संबंध में अधिकारियों से विस्तारपूर्वक चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए।
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