भोपाल
किसान-कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री कमल पटेल ने कहा है कि किसी भी वैज्ञानिक तकनीक का मुख्य लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण और स्वास्थ्यवर्द्धक खाद्यान्न उत्पादन होना चाहिये। मंत्री पटेल ने कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर भोपाल में "फसल सुधार के लिये जीन एडिटिंग'' पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला का हरदा से वर्चुअली शुभारंभ किया। कार्यशाला में वैज्ञानिकों ने अपने विचार व्यक्त किये एवं जीन एडिटेड फसलों के विकास और विस्तार की संभावनाओ पर गहन चिंतन किया।
कृषि मंत्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्म-निर्भर भारत और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश बनाने के लिये वैज्ञानिकों द्वारा फसलों की नवीन किस्मों को तैयार करने के लिए नवीन तकनीकों का विकास किया जा रहा है। फसल सुधार के लिये जीन एडिटिंग एक प्रभावशाली तकनीक है। इस तकनीक से फसलों की गुणवत्ता में सुधार लाने के साथ ही रासायनिक तत्वों के न्यूनतम उपयोग के साथ स्वास्थ्यवर्द्धक खाद्यान्न का उत्पादन किया जा सकता है। वैज्ञानिकों को इस ओर अधिक ध्यान देना चाहिये। पटेल ने कहा कि जीन एडिटिंग से जलवायु परिवर्तन, फसलों में आमतौर पर होने वाली बीमारियों और कीट-प्रकोप पर प्रभावी तरीके से रोक लगाने के प्रयास भी होने चाहिये।
मंत्री पटेल ने वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि निश्चित ही इस कार्यशाला में किये गये चिंतन और मंथन से प्राप्त होने वाले निष्कर्षों का लाभ कृषि और किसानों को मिलेगा।
कार्यशाला में राजमाता विजया राजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के कुलपति प्रो. एस.के. राव, रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय झाँसी के कुलपति डॉ. एस.के. चतुर्वेदी, बॉयो टेक्नालॉजी सेंटर जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के डायरेक्टर प्रो. शरद तिवारी, बॉयोटेक कंसोर्टियम इण्डिया लिमिटेड की चीफ जनरल मैनेजर डॉ. विभा आहूजा, नेशनल इंस्टीट्यूट फार प्लांट बॉयो टेक्नालॉजी के पूर्व संचालक डॉ. एन.के. सिंह, फेडरेशन ऑफ सीड इण्डस्ट्री ऑफ इण्डिया के डायरेक्टर जनरल राम कौंडिन्य सहित कई अन्य वैज्ञानिक और शोधार्थी मौजूद थे।
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