भोपाल
प्रदेश में किसानों को गेहूं, धान सहित अन्य परंपरागत फसलों की जगह लाभकारी फसलों की खेती करने के लिए सरकार प्रोत्साहित करेगी। इस दिशा में काम करने वाली कंपनियों की हर संभव सहायता की जाएगी। साथ ही किसानों को आर्थिक सहायता भी दी जाएगी। कंपनियां किसानों से जिस उत्पाद की खेती कराएगी, उसे खरीदने की व्यवस्था भी करनी होगी। आइटीसी और ग्रीन एंड ग्रेस कंपनी किसानों को औषधीय और जैविक खेती के लिए प्रेरित करेगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई निवेश संवर्धन समिति की बैठक में कृषि विविधीकरण की दो परियोजना को मंजूरी दी गई।
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा है कि मध्य प्रदेश में पायलट आधार पर प्राकृतिक कृषि के लिए क्षेत्र चयनित कर कार्य प्रारंभ किया गया है। किसानों के आर्थिक हित को देखते हुए मध्य प्रदेश फसल विविधिकरण योजना तीन साल के लिए लागू की गई है। फसल विविधिकरण के क्षेत्र में मध्य प्रदेश अन्य राज्यों से आगे बढ़ रहा है। गेहूं और धान के स्थान पर प्राकृतिक कृषि में अन्य अनाज की फसलें लिए जाने की पहल की गई है। सोयाबीन का रकबा कम न हो क्योंकि यह भी राज्य की आवश्यकता है।
बैठक में अपर मुख्य सचिव कृषि अजीत केसरी ने बताया कि फसल विविधिकरण में कृषकों को उद्योगों के साथ कार्य के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस दौरान आइटीसी के सुधांशु ने बताया कि उन्होंने सुगंधित औषधीय पौधों के उत्पादन का काम सीहोर में प्रारंभ किया है। वैज्ञानिक शोध के आधार पर तुलसी की अनेक प्रजातियों में से अनुकूल प्रजाति का चयन किया गया है। पायलट प्रोजेक्ट से जुड़ने के लिए किसान प्रेरित हुए हैं। वहीं, ग्रीन एंड ग्रेंस कंपनी प्रतीक शर्मा ने बताया कि वे नर्मदापुरम में पिछले सात साल से काम कर रहे हैं। इससे लागत में बीस प्रतिशत की कमी और उत्पादन विक्रय में 25 से 30 प्रतिशत अधिक लाभ प्राप्त हो रहा है। बैठक में दोनों कंपनियों के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
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