नई दिल्ली
पाकिस्तान और चीन से जुड़ी भारतीय सीमा पर अब निगाहें और भी चौकस होंगीं। इसी कड़ी में भारतीय सेना ने सीमा पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी सिस्टम को तैनात कर दिया है। जानकारी के मुताबिक चीन और पाकिस्तान से सटी सीमाओं पर एआई आधारित निगरानी प्रणालियों के साथ साथ इसका उपयोग सोशल मीडिया निगरानी के लिए भी होगा। आतंकवाद रोधी अभियानों में खुफिया जानकारी जुटाने के लिए भी इस तकनीक की इस्तेमाल किया जाता है।
सीमा पर कोई भी हलचल होते ही प्रतिक्रिया शुरू!
दरअसल, पाकिस्तान के साथ लगी 749 किलोमीटर लंबी नियंत्रण रेखा और चीन से लगी 3448 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा में अब विश्व स्तरीय निगरानी प्रणाली है। द ट्रिब्यून ने अपनी एक रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि इस सिस्टम में उच्च- क्वालिटी वाले कैमरे, सेंसर, यूएवी फीड और रडार फीड शामिल हैं, जो वहां किसी भी हलचल के होते ही प्रतिक्रिया करना शुरू कर देते हैं।
मिलेगी ग्राउंड जीरो की स्थिति की लाइव फीड!
हाल के समय में कश्मीर में हुए कई एंटी टेरर ऑपरेशन की सफलता में एआई आधारित रीयल-टाइम मॉनिटरिंग सॉफ्टवेयर ने अहम भूमिका निभाई। इसी को आगे बढ़ाते हुए चीन और पाकिस्तान पर नजर रखने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ाते हुए, सेना ने ग्राउंड जीरो की स्थिति की लाइव फीड प्राप्त करने के लिए लगभग 140 कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित निगरानी प्रणाली (एआई सिस्टम) तैनात की है।
टास्क फोर्स ने रोड मैप तैयार किया
असल में रक्षा क्षेत्र में एआई के इस्तेमाल पर 2018 में एक टास्क फोर्स का गठन किया गया था। इस टास्क फोर्स ने ही सशस्त्र सेनाओं में एआई के इस्तेमाल का रोड-मैप तैयार किया है। इसी कड़ी में पिछले दिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सैन्य तकनीक और साजो सामान सेनाओं को सौंपी गई। इस दौरान इन सभी तकनीक और प्रोडेक्ट्स की प्रदर्शनी का निरीक्षण करते वक्त खुद रक्षा मंत्री राजनाथ भी मौजूद थे।
फिलहाल अब इसे सीमा पर तैनात कर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक एआई रिमोट टारगेट डिटेक्शन के साथ-साथ टारगेट के वर्गीकरण को स्पष्ट करेगा। चाहे वह आदमी हो या मशीन। यह सिस्टम यह मैन्युअल निगरानी की आवश्यकता को काफी कम कर देगा। सेना ने मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग महू में एआई सेंटर स्थापित किया है।
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