रायपुर
स्वाधीनता के अमृत उत्सव के तहत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवक राज्य के हर घर तक पहुंच रहा है और लोगों को तिरंगा फहराने के लिए प्रेरित भी कर रहा है। 15 अगस्त को लोगों को साथ लेकर छत्तीसगढ़ में स्थापित 1400 शाखाओं में ध्वजारोहण करने की योजना है।
आरएसएस के प्रांत प्रचार प्रमुख कनिराम ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद 26 जनवरी 2002 से झंडा कोड में परिवर्तन किया गया है। पहले घर में या किसी अन्य स्थान पर ध्वजारोहण पर पाबंदी थी किंतु अब भारत का कोई भी नागरिक किसी भी दिन राष्ट्रध्वज फहरा सकता है। यह ध्यान रखना होगा कि राष्ट्रध्वज फहराने के क्रम में ध्वजा की प्रतिष्ठा व गरिमा बनी रहे और किसी भी स्थिति में इसका अपमान न होने पाए। अधिकांश लोगों को यह ज्ञात नहीं है कि वे घर पर भी तिरंगा फहरा सकते हैं। तिरंगा फहराना आपका अधिकार है। भारत की संविधान सभा ने 22 जुलाई 1947 को तिरंगे को राष्ट्रध्वज के रूप में आंगीकार किया था। तिरंगा स्वाधीनता का प्रतीक है। तिरंगा भारत का अभिमान है।
आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा है कि स्वाधीनता का अमृत उत्सव पूरे देश का है। देश मिलकर इसे मनाएगा। संघ ने अमृत महोत्सव के सभी कार्यक्रमों को समर्थन दिया है। स्वयंसेवकों से भी आह्वान किया है कि ऐसे आयोजनों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लें। अमृत महोत्सव पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
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