बीजिंग
ताइवान स्ट्रेट में बढे़ तनाव के बीच अमेरिका ताइवान के आसपास चीन की सैन्य और आर्थिक गतिविधियों का मुकाबला करने के लिए कदम उठाने की योजना बना रहा है। अमेरिका ने गुरुवार को एलान किया वह ताइवान सरकार से व्यापार समझौता करेगा। माना जा रहा है कि अमेरिकी स्पीकर नैंसी पेलोसी की यात्रा से बढ़े तनाव के बीच अमेरिका इस कदम से स्वशासित ताइवान में लोकतंत्र के प्रति अपना समर्थन जताना चाहता है।
अमेरिका और ताइवान के बीच नहीं है आधिकारिक संबंध
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि आफिस ने अपने बयान में चीन से तनाव का जिक्र नहीं किया, लेकिन कहा कि औपचारिक वार्ता का मतलब व्यापार और आपसी सहयोग बढ़ाना है, इसके लिए दोनों देशों के बीच करीबी बातचीत की जरूरत होगी। वहीं, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के समन्वयक कर्ट कैंपबेल ने संवाददाताओं से पिछले सप्ताह कहा था कि व्यापार वार्ता से ताइवान के साथ संबंधों को और मजबूत करना है, हालांकि अमेरिकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अमेरिका का ताइवान के साथ कोई आधिकारिक संबंध नहीं है, लेकिन वह ताइवान में अपने अनौपचारिक दूतावास, अमेरिकी संस्थान के जरिये संबंधों को व्यापक बनाने की कोशिश करता है।
उधर, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग सरकार के अधिकारियों का कहना है कि अमेरिकी स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा ने ताइवान के स्थायी स्वतंत्रता समर्थकों को प्रोत्साहित करने की कोशिश की है। चीन ने कहा कि यह कदम युद्ध की ओर ले जाता है। हालांकि ताइवान से अमेरिका के व्यापार समझौते के एलान पर चीन की प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
यथास्थिति बनाए रखने के लिए प्रयास करते रहेंगे : नेड प्राइस
नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद इस समय अमेरिका और चीन के संबंध दशकों में सबसे अधिक खराब हो गए हैं। चीन लगातार सैन्य गतिविधियों से ताइवान पर दबाव बनाने की कोशिश में है, लेकिन ताइवान भी अपने लड़ाकू विमानों और युद्धपोतों को तैयार रखे हुए है। बुधवार को एक प्रेसवार्ता में अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता नेड प्राइस ने कहा कि ताइवान और चीन के बीच यथास्थिति बनाए रखने के लिए अमेरिका प्रयास करता रहेगा। वह ताइवान स्ट्रेट में शांति और स्थायित्व चाहता। वह चाहता है कि यह विवाद शांतिपूर्ण हल हो जाए।
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