भगवान विष्णु की उपासना के लिए आज का दिन है विशेष

फर्श से अर्श तक

ग्वालियर

सनातन धर्म में एकादशी के व्रत का विशेष महत्व है। प्रत्येक मास में दो एकादशी होती हैं और सभी का कुछ खास महत्व होता है। भाद्रपद महीने की कृष्णपक्ष की एकादशी को अजा एकादशी कहते हैं। 23 अगस्त को भाद्रपद महीने की एकादशी का व्रत किया जाएगा।

इस दिन तिथि, वार, नक्षत्र और ग्रहों से मिलकर चार शुभ योग बन रहे हैं। इस संयोग में व्रत और दान करने से मिलने वाला पुण्य और बढ़ जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु के उपेंद्र रूप की पूजा और अराधना की जाती है, इससे हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं। विद्वानों के अनुसार पुराणों में अजा एकादशी को जया एकादशी भी कहा गया है। इस दिन भगवान विष्णु और लक्ष्मी माता की पूजा करने से हर तरह के पाप और दोष खत्म होते हैं।

ज्योतिचार्य के अनुसार एकादशी 22 अगस्त को पूरा दिन रहेगी, लेकिन व्रत 23 अगस्त को होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि मंगलवार को एकादशी तिथि सूर्योदय के पहले और बाद तक रहेगी। द्वादशी तिथि के साथ होने से इसी दिन व्रत करने का विधान शास्त्रों में बताया गया है। ये दोनों तिथियां भगवान विष्णु को प्रिय है, इसलिए भगवान विष्णु की उपासना के लिए 23 अगस्त बहुत खास दिन रहेगा। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने, पूजा-पाठ करने से व्यक्ति को सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही मन को शांति और सुख की प्राप्ति होती है। अजा एकादशी पर जो कोई भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करता है, उसके पाप खत्म हो जाते हैं। व्रत और पूजा के प्रभाव से स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है। इस व्रत में एकादशी की कथा सुनने से अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है।

एकादशी का महत्व
भगवान शिव ने महर्षि नारद को उपदेश देते हुए कहा कि एकादशी महान पुण्य देने वाला व्रत है। श्रेष्ठ मुनियों को भी इसका अनुष्ठान करना चाहिए। एकादशी व्रत के दिन का निर्धारण जहां ज्योतिष गणना के मुताबिक होता है। वहीं उनका नक्षत्र आगे-पीछे आने वाली अन्य तिथियों के साथ संबंध व्रत का महत्व और बढ़ाता है।

एकादशी व्रत में इन बातों का रखें ध्यान
इस व्रत में एक समय फलाहारी भोजन ही किया जाता है। व्रत करने वाले को किसी भी तरह का अनाज सामान्य नमक, लाल मिर्च और अन्य मसाले नहीं खाने चाहिए। कुट्टू और सिंघाड़े का आटा, मावा से बनी मिठाइयां, दूध-दही और फलों का प्रयोग इस व्रत में किया जाता है और दान भी इन्हीं वस्तुओं का किया जाता है। एकादशी का व्रत करने के बाद दूसरे दिन द्वादशी को भोजन योग्य आटा, दाल, नमक,घी आदि और कुछ धन रखकर सीधे के रूप में दान करने का विधान है।

What do you feel about this post?

0%
like

Like

0%
love

Love

0%
happy

Happy

0%
haha

Haha

0%
sad

Sad

0%
angry

Angry