देहरादून
कारगिल क्षेत्र के जो ग्लेशियर सिंधु (इंडस) जैसी नदियों को सदानीरा बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं, उन पर भी जलवायु परिवर्तन का खतरा मंडरा रहा है। समय रहते इन खतरों को भांपकर ग्लेशियरों के संरक्षण की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं। हालांकि, इसके लिए पहले ग्लेशियरों के आकार में आ रहे बदलावों की सटीक जानकारी जरूरी है। यही जानकारी जुटाने के लिए वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के तीन सदस्यीय विज्ञानियों का दल सोमवार को लद्दाख रवाना हो रहा है।
विज्ञानी दल का नेतृत्व कर रहे विज्ञानी डा. मनीष मेहता के अनुसार, कारगिल क्षेत्र में पैंसिलुंगपा व दुरुंग-द्रुनग ग्लेशियर का अध्ययन किया जाएगा। इसमें देखा जाएगा कि ग्लेशियरों के मुहाने में क्या बदलाव आ रहा है। साथ ही इसके पीछे खिसकने की दर व इसके वाल्यूम में आ रहे बदलाव का भी परीक्षण किया जाएगा। इसके लिए ग्लेशियर के ऊपर रेसिस्टिविटी सर्वे भी किया जाएगा।
साथ ही देख जाएगा कि पूर्व में ग्लेशियर कहां तक फैला था, यह भी देखा जाएगा। इसका पता लगाने के लिए सेडीमेंट डेटिंग कराई जाएगी। जिसके माध्यम से एक लाख साल तक पहले की स्थिति का आकलन किया जा सकता है। पूर्व में भी इन ग्लेशियरों पर अध्ययन किया गया था और चौंकाने वाले आंकड़े सामने आने के बाद विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है। वाडिया संस्थान के दल में विज्ञानी डा. विनीत कुमार व डा. गौतम रावत भी शामिल हैं।
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