गोरखपुर: गैंगस्टर राजन तिवारी की जमानत याचिका खारिज

उत्तर प्रदेश राज्य

गोरखपुर
गोरखपुर की गैंगस्टर कोर्ट ने माफिया राजन तिवारी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। विशेष न्यायाधीश सुबोध वार्ष्णेय ने माफिया राजन तिवारी की जमानत याचिका को खारिज किया है। सरकारी वकील ने राजन तिवारी को जमानत देने के खिलाफ मजबूत दावेदारी की थी।गोरखपुर के सोहगौरा निवासी राजन तिवारी के ऊपर गैंगस्टर के मामले में ही गैर जमानती वारंट जारी था। जिस पर कैंट पुलिस ने बिहार के रक्सौल से राजन तिवारी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया था।

विशेष लोक अभियोजक अखिलेश शुक्ल और घनश्याम सिंह ने कोर्ट को बताया कि अभियुक्त राजन तिवारी गिरोहबन्द व्यक्ति है। जिसके बाद विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर कोर्ट ने माफिया राजन तिवारी की जमानत को खारिज किया है। गौरतलब है कि विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर कोर्ट में माफिया राजन की जमानत अर्जी दाखिल की गई थी।

राजन तिवारी को कैंट पुलिस ने बिहार से गिरफ्तार किया था और गोरखपुर जेल में बंद किया गया था।लेकिन गिरफ्तारी के महज 36 घंटे के अंदर राजन तिवारी को यूपी के फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में ट्रांसफर कर दिया गया था।सोमवार को राजन तिवारी के अधिवक्ता ने जमानत अर्जी का आवेदन किया था। जमानत अर्जी का विरोध करते हुए विशेष लोक अभियोजक अखिलेश शुक्ल और घनश्याम सिंह ने कोर्ट को बताया कि अभियुक्त राजन तिवारी गिरोहबन्द व्यक्ति है। वह अपने आर्थिक और भौतिक लाभ के लिए भारतीय दण्ड संहिता के अध्याय 16,17 और 22 में वर्णित अपराध करता है। अभियुक्त के खौफ से कोई मुकदमा दर्ज कराने और गवाही देने का साहस नहीं करता है। अभियुक्त के विरूद्ध हत्या और हत्या के प्रयास के दो मुकदमे गैंगचार्ट में दर्ज हैं। अभियुक्त का स्वतन्त्र रहना उचित नहीं है।

आपको बता दें कि पूर्व विधायक माफिया राजन तिवारी के खिलाफ कैंट पुलिस ने साल 1997 में गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की थी। पुलिस ने राजन तिवारी के गैंग का लीडर श्रीप्रकाश शुक्ला जबकि सदस्य के तौर में राजन तिवारी समेत चार लोगों का नाम शामिल था। हालांकि बाद में श्रीप्रकाश शुक्ला समेत तीन को पुलिस ने एनकाउंटर में मार दिया था।जबकि माफिया राजन तिवारी अब इस केस में बचा हुआ है।

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