नई दिल्ली
UPSC Civil Services Exam : उच्च न्यायालय ने कहा है कि ‘कल्याणकारी राज्य अपने दिव्यांग नागरिकों के हितों की बेहतरी के लिए स्थितियां और रोजगार के समान अवसर मुहैया कराने के लिए बाध्य है। न्यायालय ने एक दृष्टिबाधित व्यक्ति को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी नियुक्त करने का आदेश देते हुए यह टिप्पणी की है। जस्टिस संजीव सचदेवा और तुषार राव गेडेला की पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि एक कल्याणकारी राज्य से अपने दिव्यांग नागरिकों को सार्वजनिक रोजगार के अवसर मुहैया कराने के लिए अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण करने की उम्मीद की जाती है।
पीठ ने कहा कि राज्य दिव्यांग नागरिकों और व्यक्तियों (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम के तहत दिव्यांग नागरिकों के हितों की रक्षा एवं कल्याण के लिए आजीविका पैदा करने के लिए बाध्य है। न्यायालय ने वर्ष 2015 की अखिल भारतीय सिविल सेवा परीक्षा के उम्मीदवार विश्व मोहन के हक में फैसला देते हुए यह टिप्पणी की है। इस श्रेणी के तहत लाभ लेने के इच्छुक व्यक्ति का दिव्यांगता का प्रतिशत 40 होना चाहिए।
न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता हाई मायोपिया विद आइसोमेट्रोपिक एंब्लोपिया यानी आंखों की रोशनी में कमी से पीड़ित है। हाई मायोपिया विद आइसोमेट्रोपिक एंब्लोपिया (आंखों की रोशनी में कमी) से पीड़ित याचिकाकर्ता ने कुछ मेडिकल रिपोर्ट पर अधिकारियों की निर्भरता को चुनौती दी थी जिसमें कहा गया था कि वह केवल 20 प्रतिशत दृष्टिबाधित है जबकि एम्स के प्रमाणपत्र में दृष्टिबाधिता 75 प्रतिशत आकी गई थी। अदालत ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता को भारतीय प्रशासनिक सेवा (2015 बैच) में वरिष्ठता और पदोन्नति संबंधी सभी लाभों के साथ नियुक्त करे।
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