नई दिल्ली
यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ लगातार इस बात का प्रचार करते दिखे थे कि उनके शासनकाल में राज्य में दंगे नहीं हुए और कानून-व्यवस्था दुरुस्त रही। उनके इस दावे की पुष्टि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के डेटा से भी होती है। एनसीआरबी के डेटा के मुताबिक राज्य में 2021 में एक ही दंगा हुआ, जो महाराष्ट्र, राजस्थान जैसे बड़े राज्यों के मुकाबले काफी कम है। सबसे ज्यादा 100 दंगे झारखंड में हुए हैं। इस डेटा को लेकर यूपी के अडिशनल डीजीपी प्रशांत कुमार ने कहा कि इसकी वजह यह है कि राज्य में गैंगस्टर और माफियाओं के खिलाफ सख्त ऐक्शन लिया गया है। इसके अलावा सर्विलांस और तत्काल ऐक्शन के चलते भी फायदा मिला है।
उन्होंने कहा कि बीते 5 सालों में लगातार दंगों की घटनाओं में कमी देखने को मिली है। 2016 में राज्य में 45 घटनाएं सांप्रदायिक हिंसा की हुई थीं और 2017 में ही यह डेटा 36 पर आ गया था। यूपी के मुकाबले दूसरे राज्यों की तुलना करें तो डेटा में बड़ा अंतर दिखता है। बीते साल झारखंड में सबसे ज्यादा 100 दंगे हुए थे। इसके अलावा महाराष्ट्र में 77 और राजस्थान में 22 घटनाएं हुईं। बिहार में भी 51 घटनाएं सांप्रदायिक हिंसा की हुई हैं। वहीं भाजपा शासित राज्य हरियाणा में भी 40 मामले सामने आए हैं। भाजपा ने इस डेटा को लेकर झारखंड सरकार पर अटैक किया है।
झारखंड में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा कि यहां झामुमो की सरकार फेल रही है। तुष्टीकरण की राजनीति के चलते राज्य में हिंसक घटनाओं को बढ़ावा मिला है और समाज में सद्भाव कम हुआ है। वहीं झामुमो ने इन घटनाओं के लिए भाजपा को ही जिम्मेदार बताया है। झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि 2019 में जब से महागठबंधन की सरकार बनी है, तभी से भाजपा सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने में जुटी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इन हालातों को अच्छे से संभाला है। भट्टाचार्य ने कहा कि भले ही दंगों की संख्या ज्यादा है, लेकिन इस दौरान किसी की भी मौत नहीं हुई।
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