इस्लामाबाद
आर्थिक और राजनीतिक संकट में फंसे पाकिस्तान के लिए अब बाढ़ विनाशकारी साबित हो रही है. बाढ़ ने पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुंचाया है. इस भीषण बाढ़ में लाखों एकड़ भूमि में खड़ी फसल बर्बाद होने के साथ ही लाखों लोगों को विस्थापित होने के लिए मजबूर होना पड़ा है. इस स्थिति में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को करीब 18 अरब डॉलर का नुकसान पहुंचने का अंदेशा है.
पाकिस्तानी मीडिया में आई खबरों में शुक्रवार को कहा गया कि बाढ़ की वजह से 80 लाख एकड़ से अधिक फसल बरबाद हो गई है. इसके अलावा 3.3 करोड़ से अधिक लोग विस्थापित भी हुए हैं. समाचारपत्र ‘द न्यूज इंटरनेशनल’ के मुताबिक, पाकिस्तान में बाढ़ से हुए नुकसान का त्वरित आकलन करने पर सरकार ने पाया है कि यह नुकसान करीब 18 अरब डॉलर का होगा. देश का एक-तिहाई हिस्सा बाढ़ से प्रभावित है.इसी बीच उन बच्चों की जान भी संकट में आ गई है, जिन्होंने इस संकटकाल में जन्म लिया है.
बारिश, बाढ़ से बेघर होने की पीड़ा के बीच कुछ मां जहां अपने नवजात बच्चों को लेकर परेशान हैं, तो वहीं उन परिवारों के लोग भी चिंता में हैं, जिन घरों की महिलाएं गर्भवती हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का भी कहना है कि पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हेल्थ सिस्टम धराशायी हो चुका है. बाढ़ के बीच नवजात बच्चों का स्वास्थ्य खतरे में हैं, तो वहीं गर्भवती महिलाओं के हेल्थ को लेकर भी टेंशन बढ़ती जा रही है.
बाढ़ से स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं
रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि पाकिस्तान की विनाशकारी बाढ़ से महिलाएं और बच्चे अप्रत्याशित रूप से प्रभावित हुए हैं. पाकिस्तान में WHO के प्रतिनिधि डॉ. पलिता गुणरत्ना महिपाल ने बताया कि बाढ़ से देश की स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं. करीब 10% स्वास्थ्य संस्थान तहस-नहस हो गए हैं. लेकिन सबसे बड़ी चिंता उन 12 लाख गर्भवती महिलाओं की है, जो इन दिनों बाढ़ की वजह से बनाए गए अस्थायी कैंपों में रह रही हैं.
बाढ़ के बीच महामारी का खतरा
पाकिस्तान में इन दिनों लाखों लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं. सहायता कर्मियों की ओर से मुहैया कराए गए राशन के सहारे जीवन जीने को मजबूर हैं, करें भी तो क्या कोई विकल्प भी तो नहीं है. सिर्फ एक इंतजार है कि किसी तरह बाढ़ का पानी कम हो जाए तो फिर से आशियाने की जुगत की जाए. इसी बीच मलेरिया का खतरा बढ़ने लगा है. क्योंकि आसपास गंदगी की वजह से मच्छरों ने जीना मुहाल कर दिया है. इस वजह से बुखार और फ्लू के मरीज बढ़ते जा रहे हैं. लोगों को अब चिंता सताने लगी है कि कहीं महामारी न फैल जाए. वहीं WHO ने कहा है कि करीब 6.3 लाख लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं. ये संख्या बढ़ सकती है. इन दिनों टाइफाइड, स्किन डिसीज और सांस संबंधी बीमारी के मरीजों का ग्राफ भी बढ़ता जा रहा है. हमें डर है कि हालात बेकाबू न हो जाएं. क्योंकि सिंध प्रांत में हालात भयावह बने हुए हैं. अगर स्थिति बिगड़ी तो कुछ भी कहना मुश्किल है.
नुकसान और बढ़ सकता है
इस खबर के मुताबिक, पाकिस्तान को इस बाढ़ की वजह से होने वाला नुकसान और बढ़ सकता है. दरअसल पहले 42 लाख एकड़ क्षेत्र में बोई गई फसल के नुकसान पहुंचने का अनुमान लगाया गया था लेकिन नया अनुमान 82.5 लाख एकड़ क्षेत्र में लगी फसल के तबाह होने का है.
रिपोर्ट के मुताबिक कपास, धान समेत कई फसलों को खासा नुकसान पहुंचा है और यदि बाढ़ के पानी की निकासी ठीक से नहीं की गई तो गेहूं की बुवाई पर भी इसका असर पड़ सकता है. इस बीच राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मंत्रालय को गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने के बारे में विवरण तैयार करने का काम सौंपा गया है.
हालात और बिगड़ सकते हैं
रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पहले ही कह चुका है कि बाढ़ वाले क्षेत्रों में 64 लाख से अधिक लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता है. पाकिस्तान में जुलाई और अगस्त में 30 साल के औसत से लगभग 190 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है, जो कुल 391 मिमी (15.4 इंच) है, जबकि सिंध में औसत से 466% अधिक बारिश हुई है.
संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी (UNHRC) के एक शीर्ष अधिकारी ने चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में अभी और बारिश होने की संभावना है, जिस कारण स्थिति और खराब हो सकती है. पाकिस्तान के उत्तरी पहाड़ों में रिकॉर्ड तोड़ मानसूनी बारिश और ग्लेशियर के पिघलने से बाढ़ आई थी.
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