करोड़ों खर्च होने के बाद भी झील-नदी में गिर रहा कचरा, 120 करोड़ रुपए का हर्जाना लगा

उत्तर प्रदेश राज्य

गोरखपुर
 
एनजीटी ने रामगढ़झील, राप्ती, रोहिन आदि नदियों को प्रदूषित पानी गिरने को लेकर प्रदेश सरकार का 120 करोड़ रुपये का हर्जाना लगाया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद भी जिम्मेदारों की लापरवाही से प्रदूषित पानी और कचरा सीधे झील से लेकर नदी में गिर रहा है। सीवर लाइन, एसटीपी पर करोड़ों खर्च का कोई लाभ नहीं दिख रहा है।

शहर का लाखों लीटर कचरा रामगढ़झील, चिलुआताल, राप्ती और आमी नदी में गिराया जाता है। रामगढ़झील में तो कुछ वैरियर है लेकिन चिलुआताल, राप्ती व आमी में कचरा गिराया जा रहा। रामगढ़झील में कचरा नहीं गिरने को लेकर जलनिगम के साथ प्रशासनिक अफसरों ने हलफनामा भी दाखिल कर रखा है अफसरों की अनदेखी से रोज लाखों लीटर गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट किए ही रामगढ़झील में गिर रहा है। जल निगम ने एनजीटी में हलफनाम दाखिल कर रखा है कि 1700 एकड़ में फैले रामगढ़ताल में नालों से आने वाले कचरे का शोधन कर ताल में गिराया जा रहा है। चिलुआताल के पास नहीं बना एसटीपी मेडिकल कॉलेज से सटे मानबेला में करीब 400 एकड़ में विकसित होने वाली विभिन्न परियोजनाओं के ड्रेनेज सिस्टम को लेकर जीडीए चिलुआताल के पास एसटीपी का निर्माण करने का दावा अमल में नहीं आ रहा है।
 
गीडा नहीं बना सका सीईटीपी
एनजीटी में दायर मामले में कड़ी फटकार के बाद गीडा प्रशासन ने औद्योगिक कचरे को रोकने के लिए पांच एमएलडी के सीईटीपी का प्रस्ताव तो तैयार किया लेकिन वह अभी भी फाइलों की धूल फांक रहा है। बता दें कि आमी के प्रदूषण को लेकर मीरा शुक्ला और आमी बचाओ मंच के विश्वविजय सिंह ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में केस कर रखा है।

 

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