नोएडा
उत्तर प्रदेश के 20 वन संभागों में वाहनों के फर्जी पंजीकरण नंबर का उल्लेख करते हुये विभिन्न कार्यों के लिये 1.37 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है।
ट्रैक्टर और खुदाई करने वाली मशीन के नाम पर जिन वाहनों का भुगतान किया गया था, उनका पंजीकरण नंबर मोटरसाइकिल, जीप, स्कूटर, मोपेड आदि के रूप में पंजीकृत है। मार्च 2020 में समाप्त हुए वर्ष के लिये कैग की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।
रिपोर्ट को हाल में उत्तर प्रदेश विधानसभा के पटल पर रखा गया था। रिपोर्ट की प्रति सामचार एजेंसी पीटीआई-भाषा के पास भी है।
नियमों का हवाला देते हुए, कैग ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार यह प्रावधान करती है कि ठेकेदारों को काम या आपूर्ति के लिए भुगतान केवल संभागीय अधिकारी या अधिकृत अधीनस्थ अधिकारी द्वारा किया जा सकता है।
कैग ने कहा कि कोई भुगतान तब तक नहीं किया जाना चाहिए, जब तक कि मात्रा और दरों के साथ-साथ काम या आपूर्ति की गुणवत्ता और अन्य आवश्यक कारकों के संबंध में दावे की सत्यता एक अधिकृत अधिकारी द्वारा मंजूर नहीं की जाती है।
इसने कहा, ‘‘भुगतान वाउचर में ठेकेदार का नाम (जिसे भुगतान किया गया), ट्रैक्टर या जेसीबी (खुदाई करने की मशीन) का पंजीकरण नंबर (जिसके माध्यम से कार्य निष्पादित किया गया), निष्पादित कार्यों का विवरण, निष्पादित कार्यों के लिए भुगतान की गई दरों और राशि आदि का विवरण होता है।’’
इसमें कहा गया है कि आॅडिट के दौरान उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग के रिकॉर्ड के साथ भुगतान ‘वाउचर’ में दर्ज ट्रैक्टर या जेसीबी के पंजीकरण नंबर का सत्यापन कराया गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें यह पता चला कि भुगतान ‘वाउचर’ में उल्लेख किये गए वाहन पंजीकरण संख्या, जिसके लिये संभागीय वन अधिकारी की ओर से भुगतान किया गया था, ट्रैक्टर और उत्खनक के अलावा अन्य वाहनों के रूप में पंजीकृत थे। इसमें कहा गया है कि ये मोटरसाइकिल, जीप, स्कूटर, मोपेड आदि के पंजीकरण नंबर थे।
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